आज का पंचांग
एक आधुनिक दैनिक हिंदू पंचांग — तिथि, नक्षत्र, चौघड़िया, राहु काल और शुभ मुहूर्त, लाइव टाइमलाइन पर, भारत के 133 शहरों के लिए।
आज गुरुवार, 5 नवंबर 2026 है। तिथि एकादशी (कृष्ण पक्ष), नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी। दिल्ली में सूर्योदय 06:35, राहु काल 13:26–14:49। स्थानीय समय हेतु अपना शहर चुनें।
शहर अनुसार पंचांग
आज का पंचांग क्या है?
"आज का पंचांग" का अर्थ है आज के दिन का हिंदू पंचांग — वह सारणी जो बताती है कि आज कौन-सी तिथि है, कौन-सा वार व नक्षत्र है, और दिन के कौन-से घंटे शुभ या अशुभ हैं। "पंचांग" शब्द संस्कृत के पंच (पाँच) और अंग से बना है, यानी दिन के "पाँच अंग" — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इन्हीं पाँच के साथ सूर्योदय-सूर्यास्त, चंद्र मास व ऋतु, और चौघड़िया, राहु काल व अभिजित मुहूर्त जुड़कर एक संपूर्ण दैनिक पंचांग बनाते हैं। Panchang Daily यह सब आपके शहर के लिए, आज की तिथि पर, स्थापित खगोलीय गणना से प्रस्तुत करता है — किसी छपी हुई सामान्य सारणी से नहीं।
आज के पाँच अंग कैसे पढ़ें
ऊपर अपना शहर चुनते ही आपको उसका आज का पंचांग एक लाइव टाइमलाइन पर दिख जाता है। पाँच अंग इस प्रकार पढ़े जाते हैं:
- तिथि — आज का चंद्र दिवस (जैसे शुक्ल पक्ष की पंचमी)। तिथि चंद्रमा की सूर्य से दूरी पर आधारित है और सूर्योदय के समय जो तिथि हो, वही पूरे दिन मानी जाती है।
- वार — आज का सप्ताह-दिन और उसका स्वामी ग्रह (जैसे गुरुवार–गुरु)। स्वामी ग्रह दिन का स्वभाव तय करता है।
- नक्षत्र — आज चंद्रमा किस नक्षत्र में है (27 में से एक)। यह नामकरण, विवाह मिलान व मुहूर्त में केंद्रीय है।
- योग — सूर्य व चंद्र के देशांतरों के योग से बना 27 में से एक संयोग।
- करण — आधी तिथि; ग्यारह करणों में से एक।
इन पाँच को एक साथ देखकर दिन का समग्र स्वरूप समझ में आता है — कौन-सा कार्य आज अनुकूल है और कौन-सा नहीं। प्रत्येक अंग को गहराई से जानने के लिए तिथि, वार और नक्षत्र पृष्ठ देखें।
सूर्योदय, सूर्यास्त और दिन के शुभ-अशुभ समय
पंचांग का व्यावहारिक हृदय इसके समय-खंड हैं। दिन का आरंभ सूर्योदय से और अंत सूर्यास्त से होता है, और इन्हीं से दिन के सभी मुहूर्त निकलते हैं। सूर्योदय से पहले का लगभग 96 मिनट का ब्रह्म मुहूर्त पूजा, ध्यान व अध्ययन के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। मध्याह्न के आसपास का अभिजित मुहूर्त लगभग हर कार्य के लिए शुभ है। इनके विपरीत राहु काल, यमगंड और गुलिक दिन के वे भाग हैं जिनमें नया शुभ कार्य आरंभ करने से बचा जाता है। टाइमलाइन पर ये सभी रंगों से चिह्नित रहते हैं, ताकि एक नज़र में दिखे कि कब कार्य करें और कब रुकें।
आज का चौघड़िया, राहु काल और अभिजित
दिन के भीतर सर्वोत्तम घंटा चुनने के लिए चौघड़िया सबसे सरल विधि है — दिन व रात को आठ-आठ भागों में बाँटकर हर भाग को अमृत, शुभ, लाभ (शुभ), चर (सम) या उद्वेग, रोग, काल (त्याज्य) में वर्गीकृत किया जाता है। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए अमृत/शुभ/लाभ चुनें, यात्रा के लिए चर भी उत्तम, और राहु काल टालें। आज का सटीक चौघड़िया और राहु काल अपने शहर के लिए देखें, और किसी अन्य तिथि की योजना मुहूर्त प्लानर से बनाएँ।
मास, पक्ष, ऋतु और संवत
पाँच अंगों के साथ पंचांग यह भी बताता है कि आज कौन-सा चंद्र मास (चैत्र, वैशाख … फाल्गुन) व पक्ष (शुक्ल या कृष्ण) चल रहा है, कौन-सी ऋतु है, और कौन-सा संवत (प्रायः विक्रम संवत)। शुक्ल पक्ष अमावस्या से पूर्णिमा तक का बढ़ता पखवाड़ा है और कृष्ण पक्ष पूर्णिमा से अमावस्या तक का घटता। यह जानकारी व्रत, त्योहार व मासिक तिथियों को समझने में सहायक है — जैसे एकादशी, प्रदोष व संकष्टी हर पक्ष में आते हैं।
इस पृष्ठ का अपने शहर के लिए उपयोग कैसे करें
ऊपर खोज बॉक्स में अपना शहर टाइप करें या सूची से चुनें। शहर पृष्ठ पर आपको आज की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार व मास, दिन व रात के सभी चौघड़िया, राहु काल, यमगंड, गुलिक, अभिजित व ब्रह्म मुहूर्त, तथा सूर्योदय-सूर्यास्त एक लाइव टाइमलाइन पर मिलते हैं। जिस कार्य की योजना हो, उसके समय पर चल रहे चौघड़िया को देखें और तदनुसार समय चुनें। यही दैनिक उपयोग का सबसे सरल तरीका है।
व्रत, त्योहार और विशेष दिन
पंचांग केवल आज तक सीमित नहीं — यह आगामी व्रत व त्योहारों की योजना में भी सहायक है। एकादशी (विष्णु का उपवास-दिवस), पूर्णिमा, अमावस्या, प्रदोष व संकष्टी जैसी मासिक तिथियाँ, तथा दिवाली, होली, नवरात्रि जैसे बड़े पर्व सब चंद्र कैलेंडर पर आधारित हैं। आगामी तिथियाँ देखने के लिए त्योहार कैलेंडर व व्रत तिथियाँ देखें, और स्वर्ण-खरीद के शुभ दिनों के लिए स्वर्ण-खरीद दिन।
पंचांग हर शहर के लिए अलग क्यों गणना होता है
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा की स्थिति अक्षांश-देशांतर पर निर्भर करती है। इसलिए एक ही दिन दो शहरों में सूर्योदय की तिथि, नक्षत्र, चौघड़िया व राहु काल थोड़े भिन्न हो सकते हैं — पूर्वी शहरों में सूर्योदय पहले होता है, अतः उनका राहु काल भी पहले आता है। यदि कोई तिथि सूर्योदय के आसपास बदल रही हो, तो पूर्वी व पश्चिमी शहरों में दिन की तिथि एक दिन तक भिन्न हो सकती है। इसीलिए Panchang Daily हर शहर के निर्देशांकों से इसे अलग गणना करता है।
हम पंचांग की गणना कैसे करते हैं
सभी मान दृक् गणित (वेधाधारित गणना) से निकाले जाते हैं — किसी शहर के अक्षांश-देशांतर के लिए सूर्य व चंद्र की वास्तविक स्थिति निकालकर तिथि, नक्षत्र, योग व करण प्राप्त किए जाते हैं, और सूर्योदय-आधारित समय-खंड (चौघड़िया, राहु काल) दिन के वास्तविक सूर्योदय-सूर्यास्त से। यह पुरानी सारणी-आधारित (वाक्य) विधियों से अधिक सटीक है। कुछ पंचांग सूर्योदय की परिभाषा या अयनांश में थोड़ा भिन्न मत रखते हैं, जिससे कुछ मिनटों का अंतर संभव है; अतः धार्मिक अनुष्ठान के लिए अपने स्थानीय पंचांग से भी पुष्टि कर लें। हम कोई मान हाथ से नहीं बदलते और न ही गढ़ते हैं।
पंचांग को दैनिक आदत बनाना
पंचांग का सर्वोत्तम लाभ तब मिलता है जब इसे एक छोटी दैनिक आदत बना लिया जाए — हर सुबह आज की तिथि, नक्षत्र, चौघड़िया व राहु काल पर एक नज़र डालें, और महत्वपूर्ण कार्यों को शुभ समय पर व राहु काल के बाहर रखें। यह न कोई अंधविश्वास है और न भय — बल्कि हर महत्वपूर्ण शुरुआत को सोच-समझकर व शुभ संकल्प के साथ करने की सहस्राब्दियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है। नए हैं? पूरी जानकारी के लिए संपूर्ण पंचांग गाइड पढ़ें।
तिथि और उसके पाँच स्वभाव
तिथि पंचांग का सबसे बदलता हुआ अंग है और इसे समझना दिन पढ़ने की कुंजी है। एक चंद्र मास में तीस तिथियाँ होती हैं — पंद्रह शुक्ल पक्ष में (अमावस्या से पूर्णिमा तक, बढ़ता चंद्र) और पंद्रह कृष्ण पक्ष में (पूर्णिमा से अमावस्या तक, घटता चंद्र)। प्रत्येक तिथि का एक अधिष्ठाता देव है और वह पाँच स्वभावों में से एक में आती है, जो दोहराते रहते हैं: नंदा (प्रतिपदा, षष्ठी, एकादशी) उत्सव व सुख हेतु; भद्रा (द्वितीया, सप्तमी, द्वादशी) व्यापार व नींव हेतु; जया (तृतीया, अष्टमी, त्रयोदशी) साहसी कार्य व विजय हेतु; रिक्ता (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) प्रायः त्याज्य; और पूर्णा (पंचमी, दशमी, पूर्णिमा) समापन व यात्रा हेतु शुभ। इसीलिए किसी शुभ कार्य से पूर्व लोग तिथि व उसका स्वभाव देखते हैं। प्रत्येक तिथि को गहराई से तिथि पृष्ठों पर जानें।
नक्षत्रों से गुज़रता चंद्रमा
चंद्रमा लगभग सवा दिन में एक नक्षत्र पार करता है, और 27 नक्षत्रों का यह चक्र लगभग एक चंद्र मास में पूरा होता है। सूर्योदय के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो, वही दिन का नक्षत्र है और मुहूर्त में उपयोग होता है। हर नक्षत्र का एक अधिष्ठाता देव, प्रतीक, स्वामी ग्रह और तीन वर्गीकरण होते हैं — गण (देव/मनुष्य/राक्षस स्वभाव), नाड़ी (आयुर्वेदिक — वात/पित्त/कफ) और योनि (पशु-प्रतीक) — जो विवाह मिलान (गुण मिलान) में केंद्रीय हैं। हर नक्षत्र चार पादों में बँटा है, और जन्म के समय का पाद बच्चे का नामकरण-अक्षर तय करता है। अपना जन्म नक्षत्र जानने के लिए जन्म नक्षत्र कैलकुलेटर का उपयोग करें, या सभी 27 नक्षत्र देखें।
वार, उसका ग्रह और स्वभाव
सप्ताह का हर दिन एक ग्रह व देवता को समर्पित है, और यही उस दिन का स्वभाव तय करता है: रविवार–सूर्य (स्वास्थ्य, अधिकार), सोमवार–चंद्र (मन, जल, यात्रा), मंगलवार–मंगल (साहस, ऊर्जा), बुधवार–बुध (विद्या, व्यापार), गुरुवार–गुरु (शिक्षा, संस्कार), शुक्रवार–शुक्र (विवाह, कला), शनिवार–शनि (अनुशासन, सेवा)। इसीलिए गुरुवार शिक्षा-आरंभ हेतु, शुक्रवार विवाह व कला हेतु, और सोमवार यात्रा हेतु शुभ माने जाते हैं। वार ही दिन का राहु काल, यमगंड व गुलिक भी तय करता है। हर वार का विस्तृत विवरण वार पृष्ठों पर देखें।
विशेष काल: पंचक, भद्रा और अन्य
पाँच अंगों के अतिरिक्त कुछ विशेष काल भी मुहूर्त में देखे जाते हैं। भद्रा (विष्टि करण) कुछ मांगलिक कार्यों में टाली जाती है। पंचक पाँच नक्षत्रों (धनिष्ठा से रेवती) का वह समूह है जिसमें कुछ विशेष कार्य — जैसे छत डालना, दक्षिण-यात्रा या ईंधन-संग्रह — टाले जाते हैं। गंडमूल नक्षत्र (अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल, रेवती) में जन्म पर विशेष शांति-पूजा की परंपरा है। ये सूक्ष्म विचार हैं; दैनिक कार्यों के लिए शुभ चौघड़िया व राहु काल से बचाव पर्याप्त है, पर बड़े संस्कारों में इन्हें भी तौला जाता है।
भारत भर की क्षेत्रीय पंचांग परंपराएँ
यद्यपि सिद्धांत एक है, पंचांग की क्षेत्रीय शैलियाँ भिन्न हैं। उत्तर भारत प्रायः पूर्णिमांत मास (पूर्णिमा पर समाप्त) मानता है, जबकि दक्षिण व पश्चिम अमांत (अमावस्या पर समाप्त) — तिथियाँ वही रहती हैं, केवल कृष्ण पक्ष का मास-नाम बदलता है। तमिलनाडु सौर पंचांग (सूर्य के राशि-प्रवेश पर मास) अपनाता है; बंगाल व केरल की भी अपनी सौर-गणना है। वर्ष विक्रम संवत (लगभग 57 वर्ष आगे) व शक संवत में गिने जाते हैं। इन भिन्नताओं के कारण कुछ त्योहारों की तिथि क्षेत्र अनुसार एक दिन आगे-पीछे हो सकती है — इसीलिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि की सलाह दी जाती है।
एक उदाहरण: पूरा दिन पढ़ना
मान लीजिए आज गुरुवार, शुक्ल पक्ष की पंचमी, नक्षत्र पुष्य है। पढ़ने का क्रम यह होगा: तिथि पंचमी (पूर्णा स्वभाव — शुभ, विद्या-आरंभ हेतु उत्तम); वार गुरुवार (गुरु का दिन — शिक्षा व संस्कार हेतु शुभ); नक्षत्र पुष्य (सर्वाधिक शुभ नक्षत्रों में, विशेषकर खरीद व नए कार्य हेतु)। यह संयोग विद्या-आरंभ, व्यापार या स्वर्ण-खरीद के लिए विशेष शुभ बनता है। अब दिन के भीतर अमृत/शुभ/लाभ चौघड़िया चुनें, अभिजित मुहूर्त का लाभ लें, और राहु काल (गुरुवार को छठा भाग) टालें। इसी प्रकार पाँच अंगों को समय-खंडों के साथ मिलाकर कोई भी दिन पढ़ा जा सकता है।
सामान्य प्रश्न
आज का पंचांग क्या है?
आज का पंचांग यानी आज की तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण, साथ ही सूर्योदय/सूर्यास्त, चौघड़िया, राहु काल और मुहूर्त। मान शहर अनुसार भिन्न होते हैं।
आज की तिथि क्या है?
आज की तिथि (संदर्भ: दिल्ली) एकादशी (कृष्ण पक्ष) है। सटीक स्थानीय तिथि हेतु अपना शहर खोलें।