सात चौघड़िया — अर्थ, ग्रह व उपयोग
चौघड़िया शुभ समय चुनने की सबसे प्रचलित दैनिक विधि है। यहाँ हर एक का अर्थ, स्वामी ग्रह व उपयुक्त कार्य दिए हैं।
सात चौघड़िया होते हैं। अमृत, शुभ व लाभ शुभ हैं; चर सम है (यात्रा हेतु शुभ); और उद्वेग, रोग व काल अशुभ हैं। हर एक का स्वामी ग्रह है, और दिन व रात को आठ-आठ ~90 मिनट के चौघड़िया में बाँटा जाता है।
सात चौघड़िया — एक दृष्टि में
| चौघड़िया | ग्रह | स्वभाव | अर्थ |
|---|---|---|---|
| अमृत Amrit | चंद्र | शुभ | सर्वाधिक शुभ चौघड़िया — अमृत समान। सभी महत्वपूर्ण कार्यों हेतु उत्तम। |
| शुभ Shubh | गुरु | शुभ | शुभ — समारोह, विवाह व पूजा हेतु वरीय। |
| लाभ Labh | बुध | शुभ | 'लाभ' — व्यापार, शिक्षा व नए उद्यम हेतु वरीय। |
| चर Char | शुक्र | सम | 'चंचल' — सम, और विशेषकर यात्रा हेतु शुभ माना जाता है। |
| उद्वेग Udveg | सूर्य | अशुभ | चिंता उत्पन्न करता है — नए कार्य हेतु टाला जाता है (सरकारी कार्य हेतु ग्राह्य)। |
| रोग Rog | मंगल | अशुभ | 'रोग' — टाला जाता है; विवाद व स्वास्थ्य-समस्याओं से संबद्ध। |
| काल Kaal | शनि | अशुभ | अशुभ — महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने हेतु टाला जाता है। |
चौघड़िया कैसे काम करता है
दिन, सूर्योदय से सूर्यास्त तक, आठ बराबर भागों में बँटता है, और रात, सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक, आठ और में — कुल सोलह चौघड़िया। हर भाग सात नामित चौघड़िया में से एक है, जिसका स्वामी ग्रह होता है: चंद्र, गुरु व बुध शुभ अमृत, शुभ व लाभ देते हैं; शुक्र सम चर देता है; और सूर्य, मंगल व शनि उद्वेग, रोग व काल लाते हैं। क्रम हर वार अलग चौघड़िया से आरंभ होता है, इसलिए वही घड़ी का समय एक दिन से दूसरे दिन अलग चौघड़िया रखता है।
सात चौघड़िया विस्तार से
अमृत (Amrit) — शुभ, स्वामी चंद्र
सर्वाधिक शुभ चौघड़िया — अमृत समान। सभी महत्वपूर्ण कार्यों हेतु उत्तम। अमृत किसी भी महत्वपूर्ण कार्य हेतु सर्वोत्तम समय है — विवाह-वार्ता, हस्ताक्षर, खरीद, औषधि व यात्रा।
शुभ (Shubh) — शुभ, स्वामी गुरु
शुभ — समारोह, विवाह व पूजा हेतु वरीय। शुभ समारोह, पूजा, विवाह, गृह प्रवेश व शिक्षा-आरंभ हेतु उत्तम है।
लाभ (Labh) — शुभ, स्वामी बुध
'लाभ' — व्यापार, शिक्षा व नए उद्यम हेतु वरीय। लाभ ('लाभ') व्यापार, दुकान खोलने, निवेश, साक्षात्कार व नई विद्या सीखने हेतु आदर्श है।
चर (Char) — सम, स्वामी शुक्र
'चंचल' — सम, और विशेषकर यात्रा हेतु शुभ माना जाता है। चर ('चंचल') समग्रतः सम है और विशेषकर यात्रा व चल-कार्यों हेतु उपयुक्त है।
उद्वेग (Udveg) — अशुभ, स्वामी सूर्य
चिंता उत्पन्न करता है — नए कार्य हेतु टाला जाता है (सरकारी कार्य हेतु ग्राह्य)। उद्वेग बेचैनी लाता है और नए कार्य हेतु टाला जाता है; दिनचर्या या सरकारी कार्यों हेतु सह्य है।
रोग (Rog) — अशुभ, स्वामी मंगल
'रोग' — टाला जाता है; विवाद व स्वास्थ्य-समस्याओं से संबद्ध। रोग ('रोग') किसी भी महत्वपूर्ण कार्य हेतु टाला जाता है और विवाद व स्वास्थ्य-हानि से जुड़ा है।
काल (Kaal) — अशुभ, स्वामी शनि
अशुभ — महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने हेतु टाला जाता है। काल अशुभ है और कोई मूल्यवान कार्य आरंभ करने हेतु टालना उत्तम है।
दिन बनाम रात चौघड़िया
दिन के चौघड़िया (सूर्योदय से सूर्यास्त) दिन के कार्यों हेतु, और रात के चौघड़िया (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) संध्या व रात्रि कार्यों जैसे यात्रा या रात्रि अनुष्ठान हेतु उपयोग होते हैं। दोनों का अपना आठ-गुना क्रम है, अतः जिस समय कार्य करना हो उसका सही समूह देखें।
किस कार्य हेतु कौन-सा चौघड़िया
- विवाह, पूजा, गृह प्रवेश: अमृत या शुभ।
- व्यापार, खरीद, नए उद्यम: लाभ या अमृत।
- यात्रा: चर (साथ ही अमृत, शुभ, लाभ)।
- दिनचर्या या अपरिहार्य कार्य: उद्वेग सह्य है; रोग व काल से बचें।
राहु काल व अभिजित के साथ चौघड़िया
अच्छे चौघड़िया में भी दिन के राहु काल, यमगंड व गुलिक से बचना बुद्धिमानी है। मध्याह्न के आसपास का अभिजित मुहूर्त चौघड़िया चाहे जो हो, अधिकांश कार्यों हेतु शुभ है (कुछ परंपराओं में बुधवार को छोड़कर)। अपने शहर का सजीव आज का चौघड़िया देखें या किसी भी दिन की योजना मुहूर्त प्लानर से बनाएँ।
सामान्य प्रश्न
चौघड़िया क्या है?
चौघड़िया शुभ समय चुनने की वैदिक विधि है। दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) व रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है, प्रत्येक लगभग 90 मिनट का, हर भाग का एक स्वामी ग्रह और शुभ/सम/अशुभ वर्ग होता है।
सबसे शुभ चौघड़िया कौन-सा है?
अमृत सबसे शुभ है, फिर शुभ व लाभ। चर सम है और यात्रा हेतु उत्तम; उद्वेग, रोग व काल नए कार्य हेतु टाले जाते हैं।
यात्रा हेतु कौन-सा चौघड़िया सर्वोत्तम है?
चर पारंपरिक रूप से यात्रा हेतु सर्वोत्तम है; अमृत, शुभ व लाभ भी उपयुक्त हैं।
एक चौघड़िया कितनी देर का होता है?
लगभग 90 मिनट, यद्यपि दिन की लंबाई के अनुसार सटीक अवधि बदलती है, क्योंकि दिन को सदा आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है।
क्या चौघड़िया हर दिन बदलता है?
हाँ — आरंभिक चौघड़िया वार अनुसार बदलता है, इसलिए वही घड़ी का समय अलग-अलग दिन अलग चौघड़िया रखता है, और समय शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से भी बदलते हैं।