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नामकरण मुहूर्त Namkaran Muhurat

नामकरण संस्कार हेतु शुभ दिन का चयन

त्वरित उत्तर

नामकरण मुहूर्त शिशु के नामकरण संस्कार हेतु शुभ समय है। परंपरा में यह जन्म के 11वें या 12वें दिन, अथवा प्रथम कुछ मासों में किसी शुभ नक्षत्र व तिथि वाले दिन किया जाता है।

कब किया जाता है

नामकरण शास्त्रानुसार जन्म के 11वें या 12वें दिन किया जाता है; कुछ परिवार माता-शिशु के स्वस्थ होने पर प्रथम मासों में कोई शुभ दिन चुनते हैं। नाम का प्रथम अक्षर शिशु के जन्म-नक्षत्र के पाद से लिया जाता है।

शुभ काल एक नज़र में

शुभ मासकिसी भी मास में शुभ दिन; सामान्यतः उत्तरायण मास अधिक शुभ
शुभ नक्षत्रअश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा व रेवती
शुभ तिथिनंदा, भद्रा, जया व पूर्णा तिथियाँ — द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी व त्रयोदशी
शुभ वारसोमवार, बुधवार, गुरुवार व शुक्रवार

त्याज्य काल

रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या, ग्रहण-दिवस, तथा प्रायः मंगल, शनि व रविवार।

मुहूर्त कैसे चुना जाता है

  1. परंपरागत काल (लगभग 11वें–12वें दिन, या प्रथम मासों में शुभ दिन) में दिन चुनें।
  2. शुभ नक्षत्र व तिथि चुनें, रिक्ता तिथि व अमावस्या टालते हुए।
  3. शिशु के जन्म-नक्षत्र व पाद से नाम का प्रथम अक्षर निकालें — नामकरण अक्षर गाइड देखें।
  4. उस दिन शुभ चौघड़िया या अभिजित मुहूर्त में, राहु काल से बचते हुए, संस्कार करें।

शुभ दिन व पर्व

नाम का प्रथम अक्षर जन्म-नक्षत्र व पाद से चुना जाता है — नामकरण अक्षर व जन्म-नक्षत्र कैलकुलेटर से निकालें।

महत्वपूर्ण: यह सामान्य मार्गदर्शन है, व्यक्तिगत मुहूर्त नहीं। अंतिम तिथि संबंधित कुंडली व क्षेत्रीय परंपरा देखते हुए योग्य पंडित से निश्चित करें। किसी संभावित तिथि पर चौघड़िया व राहु काल जाँचने हेतु मुहूर्त प्लानर.

Common questions

नामकरण संस्कार कब किया जाता है?

परंपरा में जन्म के 11वें या 12वें दिन, अथवा माता-शिशु के स्वस्थ होने पर प्रथम कुछ मासों में शुभ दिन।

नामकरण हेतु कौन-से नक्षत्र शुभ हैं?

रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, श्रवण व रेवती जैसे शुभ नक्षत्र।

नाम का प्रथम अक्षर कैसे तय होता है?

यह शिशु के जन्म-नक्षत्र व पाद से लिया जाता है। नामकरण अक्षर गाइड व जन्म-नक्षत्र कैलकुलेटर अक्षर बताते हैं।

नामकरण हेतु कौन-से दिन टालें?

रिक्ता तिथियाँ, अमावस्या, ग्रहण-दिवस, तथा प्रायः मंगल, शनि व रविवार।

क्या नामकरण हेतु पंडित आवश्यक है?

औपचारिक संस्कार हेतु अधिकांश परिवार पंडित बुलाते हैं; यहाँ दिया मुहूर्त सामान्य मार्गदर्शन है — अंतिम समय उनसे निश्चित करें।