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स्वर्ण खरीदने के शुभ दिन

पुष्य नक्षत्र स्वर्ण व मूल्यवान वस्तुएँ खरीदने हेतु सर्वाधिक शुभ समय है। आगामी पुष्य दिन नीचे दिए हैं (संदर्भ: दिल्ली); गुरु पुष्य (गुरुवार) व रवि पुष्य (रविवार) विशेष रूप से शुभ हैं।

त्वरित उत्तर

अगला पुष्य नक्षत्र दिन सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 है। अक्षय तृतीया व धनतेरस स्वर्ण-खरीद के अन्य पारंपरिक दिन हैं।

आगामी पुष्य नक्षत्र दिन

तिथिवारयोग
सोमवार, 5 अक्टूबर 2026सोमवारपुष्य नक्षत्र
रविवार, 29 नवंबर 2026रविवाररवि पुष्य
शनिवार, 26 दिसंबर 2026शनिवारपुष्य नक्षत्र
शनिवार, 23 जनवरी 2027शनिवारपुष्य नक्षत्र
शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2027शुक्रवारपुष्य नक्षत्र
गुरुवार, 18 मार्च 2027गुरुवारगुरु पुष्य
गुरुवार, 15 अप्रैल 2027गुरुवारगुरु पुष्य
बुधवार, 12 मई 2027बुधवारपुष्य नक्षत्र
मंगलवार, 8 जून 2027मंगलवारपुष्य नक्षत्र
मंगलवार, 6 जुलाई 2027मंगलवारपुष्य नक्षत्र

स्वर्ण-खरीद के अन्य दिन

पुष्य नक्षत्र के अतिरिक्त, अक्षय तृतीया (अप्रैल–मई) व धनतेरस (दिवाली से पूर्व) स्वर्ण खरीदने के सर्वप्रिय दिन हैं। दिन का शुभ चौघड़िया चुनने हेतु मुहूर्त प्लानर का उपयोग करें।

स्वर्ण-खरीद हेतु पुष्य नक्षत्र सर्वाधिक शुभ क्यों

वैदिक परंपरा में पुष्य को सत्ताईस नक्षत्रों में सर्वाधिक शुभ माना गया है — इसका नाम ही "पोषण" व "समृद्धि" का द्योतक है। इसके अधिष्ठाता देव देवगुरु बृहस्पति हैं, जो विवेक, वैभव व शुभता के कारक हैं, और इसका प्रतीक गौ का थन व कमल है, जो पोषण व श्री का प्रतीक है। यही कारण है कि पुष्य को स्वर्ण, आभूषण, वाहन व संपत्ति की खरीद तथा किसी भी नए, स्थायी उपक्रम के आरंभ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि पुष्य नक्षत्र में की गई खरीद व निवेश स्थायी समृद्धि लाते हैं और घटते नहीं। चूँकि चंद्रमा लगभग हर 27 दिन में एक बार पुष्य में आता है, यह शुभ अवसर महीने में लगभग एक बार आता है — और जब यह विशेष वारों के साथ मिलता है, तब इसका महत्व और बढ़ जाता है। ऊपर आपके संदर्भ-शहर के आगामी पुष्य दिन दिए गए हैं।

गुरु पुष्य और रवि पुष्य योग

पुष्य नक्षत्र का शुभत्व तब और प्रबल हो जाता है जब यह किसी विशेष वार के साथ आए। जब पुष्य गुरुवार को पड़े, तो गुरु पुष्य योग बनता है — यहाँ पुष्य के स्वामी बृहस्पति (गुरु) का दिन व नक्षत्र दोनों मिल जाते हैं, जिससे यह स्वर्ण-खरीद, नए व्यापार व विद्या-आरंभ के लिए वर्ष के सबसे शुभ दिनों में गिना जाता है। इसी प्रकार जब पुष्य रविवार को पड़े, तो रवि पुष्य योग बनता है, जो सूर्य की शुभता के साथ मिलकर वाहन, भूमि व मूल्यवान वस्तुओं की खरीद हेतु अत्यंत शुभ माना जाता है। ये योग वर्ष में कुछ ही बार आते हैं, इसीलिए लोग इनकी विशेष प्रतीक्षा करते हैं और आभूषण-विक्रेता इन दिनों विशेष आयोजन करते हैं। ऊपर की सूची में गुरु पुष्य व रवि पुष्य दिन विशेष रूप से चिह्नित हैं।

अक्षय तृतीया — स्वर्ण-खरीद का महापर्व

पुष्य नक्षत्र के मासिक अवसरों के अतिरिक्त, वर्ष में एक दिन ऐसा है जो स्वर्ण-खरीद के लिए सर्वोपरि माना जाता है — अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया, अप्रैल–मई)। "अक्षय" का अर्थ है "जो कभी क्षीण न हो", और मान्यता है कि इस दिन आरंभ किया या खरीदा गया कुछ भी अक्षय समृद्धि लाता है। यह उन दुर्लभ दिनों में है जिन्हें "अबूझ मुहूर्त" कहा जाता है — अर्थात इतना शुभ कि इस पर अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं। पौराणिक रूप से यह दिन त्रेता युग के आरंभ, गंगा के अवतरण व कुबेर को धन-प्राप्ति से जुड़ा है। इसीलिए इस दिन देश भर में स्वर्ण, चांदी व आभूषणों की भारी खरीद होती है, और कई लोग इसे नए उद्यम, निवेश या गृह-प्रवेश के लिए भी चुनते हैं। यदि आप वर्ष का सबसे शुभ स्वर्ण-दिन खोज रहे हैं, तो अक्षय तृतीया वही है।

धनतेरस और दिवाली की खरीद

वर्ष का दूसरा महान स्वर्ण-पर्व धनतेरस (कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी, अक्टूबर–नवंबर) है, जो दिवाली के पाँच दिनों का आरंभ करता है। यह देवताओं के वैद्य धन्वंतरि व धन की देवी लक्ष्मी को समर्पित है, और इस दिन स्वर्ण, चांदी, बर्तन व नई वस्तुएँ खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है — यह घर में समृद्धि व स्वास्थ्य का स्वागत है। परंपरा है कि इस दिन कुछ न कुछ धातु घर लाई जाए, चाहे वह एक छोटा सिक्का या बर्तन ही क्यों न हो। इसके साथ दिवाली की लक्ष्मी पूजा व व्यापारियों का चोपड़ा पूजन भी वर्ष के सबसे शुभ आर्थिक अवसरों में हैं। इस प्रकार पुष्य (मासिक), अक्षय तृतीया (वार्षिक, वसंत) व धनतेरस (वार्षिक, शरद) मिलकर स्वर्ण-खरीद के तीन प्रमुख स्तंभ बनाते हैं।

स्वर्ण खरीदने का मुहूर्त कैसे चुनें

शुभ दिन (पुष्य, अक्षय तृतीया या धनतेरस) चुन लेने के बाद, दिन के भीतर एक शुभ समय-खंड में खरीद करना और भी उत्तम माना जाता है। इसके लिए लाभ या अमृत चौघड़िया चुनें, या मध्याह्न का अभिजित मुहूर्त लें, और उस दिन के राहु काल से बचें। यदि पुष्य नक्षत्र किसी शुभ चौघड़िया के साथ मिल जाए, तो वह क्षण और भी शुभ हो जाता है। किसी भी दिन का चौघड़िया, राहु काल व अभिजित मुहूर्त देखने के लिए अपने शहर का मुहूर्त प्लानर या चौघड़िया खोलें। इस प्रकार आप शुभ दिन व शुभ घंटा दोनों का मेल बिठाकर खरीद को सर्वाधिक शुभ बना सकते हैं।

स्वर्ण से आगे: संपत्ति, वाहन व निवेश

ये शुभ दिन केवल स्वर्ण तक सीमित नहीं — इन्हें किसी भी मूल्यवान, स्थायी वस्तु की खरीद व किसी नए आर्थिक उपक्रम के आरंभ के लिए शुभ माना जाता है। नया वाहन घर लाना, संपत्ति के कागज़ पर हस्ताक्षर, नई दुकान या व्यापार का उद्घाटन, बड़ा निवेश या SIP का आरंभ, नया बैंक खाता या बही-खाता — इन सबके लिए पुष्य, अक्षय तृतीया व धनतेरस पारंपरिक रूप से शुभ माने जाते हैं। भावना वही है — किसी भी दीर्घकालिक आर्थिक निर्णय को एक शुभ, सुविचारित व मंगल आरंभ देना। इसीलिए वाहन-विक्रेता व भवन-निर्माता भी इन दिनों विशेष बुकिंग व आयोजन करते हैं।

डिजिटल स्वर्ण और आधुनिक खरीद

आज स्वर्ण-खरीद केवल आभूषण की दुकान तक सीमित नहीं — डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, गोल्ड ETF व ऑनलाइन आभूषण-खरीद भी लोकप्रिय हैं। परंपरा की भावना इन आधुनिक रूपों पर भी लागू होती है: यदि आप शुभ दिन पर डिजिटल स्वर्ण या बॉन्ड खरीदते हैं, तो वही शुभ संकल्प निभाया जाता है। कई लोग पुष्य या अक्षय तृतीया पर डिजिटल गोल्ड में एक छोटी राशि निवेश कर परंपरा का पालन करते हैं। इस प्रकार प्राचीन शुभता व आधुनिक निवेश-साधन सहजता से मिल जाते हैं — महत्वपूर्ण यह है कि खरीद किसी शुभ, सुविचारित क्षण में की जाए, चाहे वह भौतिक धातु हो या डिजिटल रूप।

शुभ दिनों पर खरीद की परंपरा व अर्थ

शुभ दिनों पर स्वर्ण व मूल्यवान वस्तुएँ खरीदने की परंपरा केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक व मनोवैज्ञानिक अर्थ रखती है। यह किसी आर्थिक निर्णय को जल्दबाज़ी में नहीं, बल्कि एक शुभ संकल्प, आशा व सोच के साथ लेने की परंपरा है। यह परिवार को एक साथ लाती है, समृद्धि की सामूहिक कामना को व्यक्त करती है, और खरीद को केवल एक लेन-देन नहीं, बल्कि एक मंगल अवसर बना देती है। सहस्राब्दियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है — इसीलिए हर पुष्य, अक्षय तृतीया व धनतेरस पर करोड़ों लोग इसे श्रद्धा से निभाते हैं। ऊपर अपने शहर के आगामी शुभ दिन देखें और अपनी अगली खरीद की योजना बनाएँ।

हिंदू संस्कृति में स्वर्ण का महत्व

भारतीय संस्कृति में स्वर्ण केवल एक धातु या आभूषण नहीं, बल्कि समृद्धि, शुभता व देवी लक्ष्मी का प्रतीक है। वेदों व पुराणों में स्वर्ण को "अग्नि का तेज" व "अमरता का अंश" कहा गया है, और इसे पवित्रता का प्रतीक माना गया है — यही कारण है कि पूजा-पात्रों, देव-प्रतिमाओं व मांगलिक अवसरों में स्वर्ण का विशेष स्थान है। विवाह में स्वर्ण-आभूषण न केवल श्रृंगार, बल्कि वधू के लिए एक आर्थिक सुरक्षा व परिवार की समृद्धि का प्रतीक भी हैं। त्योहारों पर स्वर्ण खरीदना घर में लक्ष्मी के आगमन का स्वागत माना जाता है। इस गहरे सांस्कृतिक व आध्यात्मिक महत्व के कारण ही स्वर्ण-खरीद को इतनी श्रद्धा से, शुभ दिनों पर व शुभ मुहूर्त में किया जाता है। यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है, जहाँ स्वर्ण को धन के साथ-साथ एक शुभ, स्थायी व पवित्र संपत्ति के रूप में देखा जाता है, जिसे परिवार की समृद्धि व सुरक्षा का आधार माना जाता है।

स्वर्ण एक बचत के रूप में — परंपरा व व्यावहारिकता

शुभ दिनों पर स्वर्ण खरीदने की परंपरा के पीछे एक व्यावहारिक ज्ञान भी छिपा है। सहस्राब्दियों से स्वर्ण को मूल्य-संचय का सबसे विश्वसनीय साधन माना गया है — यह समय के साथ अपना मूल्य बनाए रखता है, आपात स्थिति में तुरंत काम आता है, और पीढ़ियों तक हस्तांतरित किया जा सकता है। भारतीय परिवारों, विशेषकर ग्रामीण व मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए, स्वर्ण सदा एक भरोसेमंद बचत रहा है, जब औपचारिक बैंकिंग सुलभ नहीं थी। शुभ दिनों पर थोड़ा-थोड़ा स्वर्ण खरीदने की परंपरा वस्तुतः एक अनुशासित, नियमित बचत की आदत भी है — हर पुष्य, अक्षय तृतीया व धनतेरस पर कुछ न कुछ जोड़ना, समय के साथ एक सार्थक संपत्ति बना देता है। इस प्रकार परंपरा व अर्थशास्त्र दोनों मिलकर इस प्रथा को सार्थक बनाते हैं — यह केवल शुभता की कामना नहीं, बल्कि एक विवेकपूर्ण वित्तीय आदत भी है।

वर्ष भर के शुभ स्वर्ण-दिन — एक मार्गदर्शिका

वर्ष में स्वर्ण-खरीद के लिए कई शुभ अवसर आते हैं, जिन्हें जानकर आप अपनी खरीद की योजना पहले से बना सकते हैं। सबसे नियमित अवसर पुष्य नक्षत्र है, जो लगभग हर 27 दिन में आता है — महीने में एक बार। इसके साथ गुरु पुष्यरवि पुष्य योग वर्ष में कुछ बार आते हैं। वार्षिक महापर्वों में अक्षय तृतीया (अप्रैल–मई) व धनतेरस (अक्टूबर–नवंबर) सर्वोपरि हैं। इनके अतिरिक्त दिवाली (लक्ष्मी पूजा), गुड़ी पड़वा/उगादि (चंद्र नववर्ष), विजयादशमी (दशहरा) व मकर संक्रांति भी नई खरीद व निवेश के लिए शुभ माने जाते हैं। कुछ क्षेत्रों में नवरात्रि के नौ दिन भी वाहन व स्वर्ण-खरीद के लिए शुभ माने जाते हैं। ऊपर की सूची आपके शहर के आगामी पुष्य दिन दर्शाती है; वार्षिक पर्वों की तिथियों के लिए त्योहार कैलेंडर देखें।

चांदी और अन्य धातुएँ

यद्यपि स्वर्ण सर्वाधिक शुभ माना जाता है, चांदी व अन्य धातुओं की खरीद भी इन दिनों शुभ मानी जाती है। चांदी को चंद्रमा व शीतलता से जोड़ा जाता है, और इसे शांति, समृद्धि व स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है — धनतेरस पर चांदी के सिक्के, बर्तन व लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियाँ विशेष रूप से खरीदी जाती हैं। बर्तन (विशेषकर पीतल व कांसे के) भी धनतेरस पर शुभ माने जाते हैं, यही कारण है कि इस दिन को कहीं-कहीं "बर्तन खरीदने का दिन" भी कहा जाता है। जो लोग स्वर्ण नहीं खरीद सकते, उनके लिए एक छोटा चांदी का सिक्का या बर्तन भी उसी शुभ भावना का पालन है — परंपरा में महत्वपूर्ण यह है कि कुछ शुभ धातु घर लाई जाए, न कि उसका मूल्य कितना है।

स्वर्ण को शुभ रूप से रखना व उपहार देना

स्वर्ण न केवल शुभ दिन पर खरीदा जाता है, बल्कि उसे शुभ रूप से रखने व उपहार देने की भी परंपरा है। खरीदे गए स्वर्ण को घर लाकर प्रायः पूजा-स्थान में रखकर लक्ष्मी को अर्पित किया जाता है, फिर उपयोग में लिया जाता है। विवाह, जन्म, गृह-प्रवेश व अन्य मांगलिक अवसरों पर स्वर्ण उपहार देना शुभ माना जाता है — यह न केवल स्नेह, बल्कि समृद्धि की कामना का प्रतीक है। कई परिवार बच्चों के जन्म या पहले जन्मदिन पर स्वर्ण का एक छोटा आभूषण उपहार में देते हैं, जो जीवनभर की शुभता का प्रतीक बनता है। इस प्रकार स्वर्ण भारतीय जीवन के हर शुभ अवसर से जुड़ा है — खरीद से लेकर उपहार व संचय तक।

सामान्य भूलें और राहु काल से बचाव

शुभ दिन पर स्वर्ण खरीदते समय कुछ सामान्य भूलों से बचना उत्तम है। पहली — शुभ दिन तो चुन लेना पर दिन के भीतर राहु काल, यमगंड या गुलिक में खरीद कर लेना; अच्छे दिन का पूरा लाभ तब मिलता है जब खरीद शुभ चौघड़िया या अभिजित मुहूर्त में हो। दूसरी — पुष्य नक्षत्र की गणना में शहर का ध्यान न रखना; चूँकि नक्षत्र सूर्योदय के अनुसार बदलता है, पुष्य किसी शहर में एक दिन आगे-पीछे हो सकता है, इसीलिए अपने शहर का संदर्भ देखें। तीसरी — केवल शुभ समय पर ध्यान देकर खरीद की गुणवत्ता, शुद्धता (हॉलमार्क) व मूल्य की अनदेखी करना; शुभता व विवेक दोनों साथ चलने चाहिए। किसी भी दिन का सटीक राहु काल व शुभ चौघड़िया देखने के लिए राहु कालचौघड़िया पृष्ठ खोलें।

शुद्धता, हॉलमार्क और समझदारी से खरीद

शुभ मुहूर्त के साथ-साथ स्वर्ण खरीदते समय व्यावहारिक विवेक भी उतना ही आवश्यक है। स्वर्ण की शुद्धता कैरेट में मापी जाती है — 24 कैरेट शुद्धतम, पर आभूषणों के लिए प्रायः 22 कैरेट (91.6% शुद्ध) या 18 कैरेट प्रयुक्त होता है। भारत में BIS हॉलमार्क शुद्धता का प्रमाण है, अतः खरीदते समय हॉलमार्क अवश्य देखें। मूल्य में स्वर्ण के भाव के साथ मेकिंग चार्ज व GST भी जुड़ता है, इसलिए कुल मूल्य समझकर खरीदें। बिल अवश्य लें, क्योंकि यह पुनर्विक्रय व विनिमय में काम आता है। इस प्रकार शुभ दिन, शुभ मुहूर्त व समझदार खरीद — तीनों मिलकर स्वर्ण-खरीद को सचमुच शुभ व लाभकारी बनाते हैं। परंपरा शुभता देती है, पर विवेक आपकी अपनी ज़िम्मेदारी है।

भारत भर की स्वर्ण-परंपराएँ

स्वर्ण-खरीद की परंपराएँ क्षेत्र अनुसार भिन्न हैं। दक्षिण भारत में अक्षय तृतीया व धनतेरस पर स्वर्ण-खरीद अत्यंत व्यापक है, और केरल में विशु व ओणम भी शुभ अवसर हैं। उत्तर व पश्चिम भारत में धनतेरस-दिवाली स्वर्ण-खरीद का चरम है। बंगाल में दुर्गा पूजा व पोइला बैशाख पर नई खरीद होती है। गुजरात व राजस्थान के व्यापारी-वर्ग में पुष्य नक्षत्र व लाभ चौघड़िया का विशेष ध्यान रखा जाता है। दक्षिण में विवाह-स्वर्ण की परंपरा विशेष रूप से समृद्ध है। इन विविधताओं के बीच एक बात समान है — स्वर्ण को शुभ, स्थायी व मंगल संपत्ति मानना, और उसे शुभ समय पर घर लाना।

ज्योतिष में स्वर्ण: सूर्य, गुरु और समृद्धि

वैदिक ज्योतिष में स्वर्ण को सूर्य व गुरु (बृहस्पति) से जोड़ा जाता है — सूर्य आत्मा, तेज व अधिकार का कारक है, और गुरु धन, विवेक व शुभता का। यही कारण है कि गुरु से जुड़े पुष्य नक्षत्र व गुरुवार को स्वर्ण-खरीद विशेष शुभ मानी जाती है। कुछ परंपराओं में स्वर्ण को गुरु का रत्न-धातु भी माना जाता है, और कमज़ोर गुरु या सूर्य वाले लोगों को (योग्य ज्योतिषी के परामर्श से) स्वर्ण धारण करने की सलाह दी जाती है। इस प्रकार स्वर्ण केवल आर्थिक नहीं, बल्कि ज्योतिषीय व आध्यात्मिक महत्व भी रखता है, जो इसे भारतीय जीवन में एक विशेष स्थान देता है।

संदर्भ-शहर और तिथियों पर एक टिप्पणी

ऊपर दी गई पुष्य तिथियाँ दिल्ली को संदर्भ मानकर गणना की गई हैं। चूँकि नक्षत्र सूर्योदय के अनुसार बदलता है, पुष्य किसी अन्य शहर में एक दिन आगे या पीछे हो सकता है — विशेषकर तब जब नक्षत्र-परिवर्तन सूर्योदय के आसपास हो। अपने शहर के सटीक नक्षत्र व सूर्योदय-समय के लिए अपने शहर का दैनिक पंचांग देखें। अक्षय तृतीया व धनतेरस जैसे वार्षिक पर्वों की तिथियाँ चंद्र कैलेंडर पर आधारित हैं और हर वर्ष बदलती हैं; इनकी इस वर्ष की तिथि त्योहार कैलेंडर पर देखें।

संक्षेप में

स्वर्ण-खरीद के लिए वर्ष भर कई शुभ अवसर आते हैं — मासिक पुष्य नक्षत्र (व विशेष गुरु/रवि पुष्य योग), तथा वार्षिक महापर्व अक्षय तृतीया व धनतेरस। शुभ दिन के भीतर लाभ या अमृत चौघड़िया चुनें, अभिजित मुहूर्त का लाभ लें, और राहु काल से बचें। ऊपर अपने शहर के आगामी पुष्य दिन देखें, किसी भी दिन का शुभ समय मुहूर्त प्लानर से जाँचें, और वार्षिक पर्वों के लिए त्योहार कैलेंडर देखें। शुभ समय व समझदार खरीद के मेल से अपनी अगली स्वर्ण-खरीद को मंगलमय बनाएँ।

छोटी शुरुआत, बड़ी परंपरा

स्वर्ण-खरीद की सबसे सुंदर बात यह है कि इसमें राशि का कोई बंधन नहीं — परंपरा में महत्वपूर्ण यह है कि शुभ दिन पर कुछ शुभ धातु घर लाई जाए, चाहे वह एक छोटा सिक्का, एक हल्का आभूषण या डिजिटल गोल्ड में एक छोटी राशि ही क्यों न हो। यही भावना हर पुष्य, अक्षय तृतीया व धनतेरस पर करोड़ों परिवारों को जोड़ती है — बड़े व छोटे, सब अपनी सामर्थ्य अनुसार समृद्धि की एक शुभ कामना के साथ भाग लेते हैं। इस प्रकार यह परंपरा केवल स्वर्ण की नहीं, बल्कि आशा, अनुशासन व सामूहिक शुभ-संकल्प की परंपरा है। ऊपर अपने शहर के आगामी शुभ दिन देखें और इस मंगल परंपरा में सम्मिलित हों।

पुष्य तिथियाँ नक्षत्र से गणना की गई हैं (संदर्भ: दिल्ली) और अन्य शहरों में एक दिन बदल सकती हैं; स्थानीय रूप से पुष्टि करें।

सामान्य प्रश्न

स्वर्ण-खरीद हेतु पुष्य नक्षत्र शुभ क्यों है?

पुष्य को खरीद व समृद्धि हेतु सर्वाधिक शुभ नक्षत्र माना जाता है। जब यह गुरुवार (गुरु पुष्य) या रविवार (रवि पुष्य) को पड़े, तो स्वर्ण, वाहन व नए उद्यम हेतु विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

स्वर्ण खरीदने के अन्य शुभ दिन कौन-से हैं?

अक्षय तृतीया (वैशाख, अप्रैल–मई), धनतेरस (दिवाली से पूर्व, अक्टूबर–नवंबर) व पुष्य नक्षत्र के दिन स्वर्ण-खरीद हेतु पारंपरिक रूप से सर्वप्रिय हैं।

स्वर्ण खरीदने का दिन में सर्वोत्तम समय कौन-सा है?

लाभ या अमृत चौघड़िया में, या मध्याह्न के अभिजित मुहूर्त में खरीदें, और दिन के राहु काल से बचें।

क्या शुभ दिन पर डिजिटल गोल्ड खरीद सकते हैं?

हाँ — परंपरा भौतिक स्वर्ण की भाँति डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड व गोल्ड ETF पर भी लागू होती है।

क्या चांदी खरीदना भी शुभ है?

हाँ — चांदी व बर्तन भी शुभ माने जाते हैं, विशेषकर धनतेरस पर।