मुंडन मुहूर्त Mundan Muhurat
बच्चे के प्रथम मुंडन (चूड़ाकरण) हेतु शुभ दिन का चयन
मुंडन मुहूर्त बच्चे के प्रथम केश-कर्तन (चूड़ाकरण संस्कार) हेतु चुना गया शुभ समय है। परंपरा में विषम आयु-वर्ष, उत्तरायण मास व सौम्य नक्षत्र शुभ माने जाते हैं — तथा बच्चे का जन्म-नक्षत्र व जन्म-मास टाला जाता है।
कब किया जाता है
चूड़ाकरण प्रायः पहले, तीसरे या पाँचवें वर्ष (विषम वर्ष उत्तम) में, दूध छुड़ाने के बाद किया जाता है। कई परिवार पहले या तीसरे वर्ष में करते हैं। बच्चे के जन्म-मास तथा जन्म-नक्षत्र के दिन इसे टाला जाता है।
शुभ काल एक नज़र में
| शुभ मास | चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, माघ व फाल्गुन (वर्ष का उत्तरायण भाग) |
| शुभ नक्षत्र | अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा व रेवती |
| शुभ तिथि | द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी व त्रयोदशी (शुक्ल पक्ष उत्तम) |
| शुभ वार | सोमवार, बुधवार, गुरुवार व शुक्रवार |
त्याज्य काल
बच्चे का जन्म-नक्षत्र व जन्म-मास, रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अमावस्या, ग्रहण-दिवस, तथा सामान्यतः मंगल, शनि व रविवार। प्रथम मुंडन हेतु दक्षिणायन कम शुभ माना जाता है।
मुहूर्त कैसे चुना जाता है
- बच्चे की आयु शुभ (प्रायः विषम) वर्ष में हो व जन्म-मास न हो — यह सुनिश्चित करें।
- शुभ मासों में से एक चुनें, परिवार की चातुर्मास-मर्यादा का ध्यान रखते हुए।
- ऐसा दिन चुनें जिसका नक्षत्र व तिथि दोनों शुभ हों और जो बच्चे का जन्म-नक्षत्र न हो।
- उस दिन शुभ/अमृत/लाभ चौघड़िया या अभिजित मुहूर्त में, राहु काल से बचते हुए, मुंडन करें।
महत्वपूर्ण: यह सामान्य मार्गदर्शन है, व्यक्तिगत मुहूर्त नहीं। अंतिम तिथि संबंधित कुंडली व क्षेत्रीय परंपरा देखते हुए योग्य पंडित से निश्चित करें। किसी संभावित तिथि पर चौघड़िया व राहु काल जाँचने हेतु मुहूर्त प्लानर.
Common questions
मुंडन किस आयु में किया जाता है?
परंपरा में विषम वर्ष में — पहले, तीसरे या पाँचवें वर्ष — दूध छुड़ाने के बाद। क्षेत्रीय व पारिवारिक रीति भिन्न होती है, अतः बड़ों या पंडित से पुष्टि करें।
मुंडन हेतु कौन-से नक्षत्र शुभ हैं?
मृगशिरा, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा व रेवती जैसे सौम्य नक्षत्र; बच्चे का अपना जन्म-नक्षत्र टाला जाता है।
मुंडन हेतु कौन-से दिन टालें?
बच्चे का जन्म-मास व जन्म-नक्षत्र, रिक्ता तिथियाँ, अमावस्या, ग्रहण, तथा प्रायः मंगल, शनि व रविवार।
क्या चातुर्मास में मुंडन हो सकता है?
कई परिवार चातुर्मास में बड़े संस्कार टालते हैं; रीति क्षेत्र अनुसार भिन्न है। अपनी परंपरा व पंडित से पुष्टि करें।
दिन में सही समय कैसे चुनें?
शुभ चौघड़िया (अमृत, शुभ, लाभ) या मध्याह्न अभिजित मुहूर्त चुनें और राहु काल से बचें — मुहूर्त प्लानर इन्हें आपके शहर व तिथि हेतु दिखाता है।