आज का चौघड़िया
अपना शहर चुनें — आज का दिन और रात का चौघड़िया, शुभ और अशुभ मुहूर्त।
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आज का चौघड़िया कैसे देखें
ऊपर अपना शहर चुनते ही आपको उस शहर के आज के दिन के आठ चौघड़िया (सूर्योदय से सूर्यास्त तक) और रात के आठ चौघड़िया (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक) दिख जाते हैं, हर एक का आरंभ और समाप्ति समय सहित। जो कार्य आप करना चाहते हैं, बस उस घंटे पर चल रहे चौघड़िया को देखिए — यदि वह अमृत, शुभ या लाभ है तो समय शुभ है; यदि उद्वेग, रोग या काल है तो थोड़ा आगे-पीछे का शुभ खंड चुन लीजिए। यही चौघड़िया की सबसे बड़ी सुविधा है: पूरी कुंडली या पंडित के बिना भी कोई भी व्यक्ति दिन का शुभ समय स्वयं देख सकता है।
चूँकि चौघड़िया आपके शहर के वास्तविक सूर्योदय-सूर्यास्त से बनता है, इसलिए एक ही घड़ी का समय अलग-अलग शहरों और अलग-अलग दिनों में अलग चौघड़िया रखता है। इसीलिए Panchang Daily हर शहर के लिए इसे अलग से गणना करता है, किसी छपी हुई सामान्य सारणी से नहीं।
चौघड़िया क्या है?
चौघड़िया शब्द "चार घड़ी" से बना है — प्राचीन समय-मापन में एक घड़ी लगभग 24 मिनट की होती थी, अतः चार घड़ी ≈ 96 मिनट, यानी लगभग डेढ़ घंटा। यही एक चौघड़िया की अवधि है। यह मुहूर्त-शास्त्र की सबसे लोकप्रिय दैनिक विधि है क्योंकि यह सरल है और इसे याद रखना आसान है। जहाँ विवाह या गृह प्रवेश जैसे बड़े कार्यों के लिए तिथि, नक्षत्र, योग और कुंडली सब देखे जाते हैं, वहीं रोज़मर्रा के कार्यों — यात्रा, खरीदारी, दुकान खोलना, नई वस्तु लाना, महत्वपूर्ण भेंट — के लिए लोग बस चौघड़िया देख लेते हैं।
दिन और रात का आठ-आठ भागों में विभाजन
चौघड़िया की गणना में दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) को आठ बराबर भागों में और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है — कुल सोलह चौघड़िया। ध्यान दें कि प्रत्येक भाग ठीक 90 मिनट का नहीं होता: यह दिन की लंबाई पर निर्भर करता है। गर्मियों में जब दिन बड़ा होता है, दिन के चौघड़िया लंबे और रात के छोटे होते हैं; सर्दियों में इसका उल्टा। इसीलिए सटीक समय के लिए अपने शहर और तिथि का चौघड़िया देखना आवश्यक है — यही कारण है कि "औसतन 90 मिनट" कहा जाता है पर वास्तविक अवधि बदलती रहती है।
सात चौघड़िया और उनका स्वभाव
सोलह खंड सात नामों में से किसी एक के होते हैं, और हर नाम का एक स्वामी ग्रह तथा स्वभाव है:
अमृत (स्वामी: चंद्र) — सर्वाधिक शुभ
अमृत का अर्थ है "अमृततुल्य"। यह सबसे शुभ चौघड़िया है और किसी भी महत्वपूर्ण कार्य — विवाह-वार्ता, हस्ताक्षर, बड़ी खरीद, औषधि आरंभ, यात्रा — के लिए उत्तम माना जाता है। यदि दिन में अमृत उपलब्ध हो तो अधिकांश शुभ कार्य इसी में करना श्रेष्ठ है।
शुभ (स्वामी: गुरु) — शुभ
शुभ चौघड़िया समारोह, पूजा-पाठ, विवाह, गृह प्रवेश और शिक्षा-आरंभ जैसे मांगलिक व धार्मिक कार्यों के लिए विशेष रूप से उत्तम है। गुरु के आशीर्वाद से यह विद्या और संस्कार से जुड़े कार्यों में सहायक माना जाता है।
लाभ (स्वामी: बुध) — शुभ
लाभ का अर्थ है "प्राप्ति"। यह व्यापार आरंभ करने, दुकान खोलने, निवेश, साक्षात्कार, नई विद्या या कौशल सीखने के लिए आदर्श है। धन और व्यवसाय से जुड़े कार्यों के लिए लाभ या अमृत चुनना श्रेष्ठ रहता है।
चर (स्वामी: शुक्र) — सम (यात्रा हेतु शुभ)
चर का अर्थ है "चंचल" या "गतिशील"। यह समग्रतः सम (न बहुत शुभ, न अशुभ) माना जाता है, किंतु विशेष रूप से यात्रा और चल-कार्यों के लिए उत्तम है। यदि यात्रा पर निकलना हो तो चर चौघड़िया शुभ माना जाता है।
उद्वेग (स्वामी: सूर्य) — त्याज्य
उद्वेग का अर्थ है "बेचैनी"। यह नए शुभ कार्य आरंभ करने के लिए टाला जाता है क्योंकि यह चिंता और बाधा से जुड़ा है। हालाँकि सरकारी कार्य या दिनचर्या के अपरिहार्य कामों के लिए इसे सह्य माना जाता है।
रोग (स्वामी: मंगल) — त्याज्य
रोग का अर्थ है "बीमारी"। यह किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए टाला जाता है और विवाद, संघर्ष तथा स्वास्थ्य-हानि से जोड़ा जाता है। कुछ परंपराओं में शत्रु पर विजय या मुकदमे जैसे आक्रामक कार्यों के लिए इसे उपयुक्त भी माना गया है।
काल (स्वामी: शनि) — त्याज्य
काल अशुभ माना जाता है और किसी मूल्यवान कार्य के आरंभ के लिए इसे टालना उत्तम है। धन-संचय से जुड़े कुछ विशेष कार्यों में कुछ परंपराएँ इसे स्वीकार करती हैं, पर सामान्यतः इससे बचा जाता है।
प्रत्येक चौघड़िया का और भी विस्तृत विवरण — पौराणिक संदर्भ, ग्रह-स्वभाव और उपयोग — हमारे सात चौघड़िया संदर्भ पृष्ठ पर पढ़ें।
एक दृष्टि में: कौन-सा चौघड़िया कैसा
| चौघड़िया | स्वामी ग्रह | स्वभाव | किसके लिए |
|---|---|---|---|
| अमृत | चंद्र | शुभ | कोई भी महत्वपूर्ण कार्य |
| शुभ | गुरु | शुभ | पूजा, विवाह, समारोह |
| लाभ | बुध | शुभ | व्यापार, शिक्षा, निवेश |
| चर | शुक्र | सम | यात्रा, चल-कार्य |
| उद्वेग | सूर्य | त्याज्य | केवल सरकारी/दिनचर्या |
| रोग | मंगल | त्याज्य | टालें |
| काल | शनि | त्याज्य | टालें |
वार के अनुसार क्रम कैसे बदलता है
चौघड़िया का क्रम एक निश्चित चक्र में चलता है, पर हर वार का पहला चौघड़िया अलग होता है — इसीलिए वही घड़ी का समय हर दिन अलग चौघड़िया रखता है। नीचे प्रत्येक वार के दिन और रात के पहले चौघड़िया दिए हैं:
| वार | दिन का पहला चौघड़िया | रात का पहला चौघड़िया |
|---|---|---|
| रविवार | उद्वेग | शुभ |
| सोमवार | अमृत | चर |
| मंगलवार | रोग | काल |
| बुधवार | लाभ | उद्वेग |
| गुरुवार | शुभ | अमृत |
| शुक्रवार | चर | रोग |
| शनिवार | काल | लाभ |
पहले चौघड़िया के बाद क्रम इसी चक्र में आगे बढ़ता है — उद्वेग, चर, लाभ, अमृत, काल, शुभ, रोग — और आठ खंड पूरे होने तक दोहराता है।
स्वयं चौघड़िया कैसे निकालें (उदाहरण सहित)
मान लीजिए किसी सोमवार को सूर्योदय प्रातः 6:00 और सूर्यास्त सायं 6:00 है। दिन 12 घंटे यानी 720 मिनट का हुआ; इसे 8 से भाग देने पर प्रत्येक दिन-चौघड़िया 90 मिनट का बना। सोमवार का पहला दिन-चौघड़िया अमृत है, अतः क्रम बनेगा:
- 6:00–7:30 — अमृत (शुभ)
- 7:30–9:00 — काल (त्याज्य)
- 9:00–10:30 — शुभ (शुभ)
- 10:30–12:00 — रोग (त्याज्य)
- 12:00–1:30 — उद्वेग (त्याज्य)
- 1:30–3:00 — चर (सम)
- 3:00–4:30 — लाभ (शुभ)
- 4:30–6:00 — अमृत (शुभ)
इस उदाहरण में सोमवार को खरीदारी या व्यापार के लिए 3:00–4:30 (लाभ) या प्रातः 6:00–7:30 (अमृत) उत्तम रहेगा, जबकि 10:30 से 1:30 तक का समय (रोग व उद्वेग) टालना चाहिए। वास्तविक जीवन में सूर्योदय-सूर्यास्त हर शहर व दिन में बदलते हैं, इसलिए ऊपर अपने शहर का सटीक चौघड़िया देखना सबसे अच्छा है।
किस कार्य के लिए कौन-सा चौघड़िया
- विवाह, सगाई, मांगलिक कार्य: अमृत या शुभ
- गृह प्रवेश, पूजा, हवन: शुभ या अमृत (और अभिजित मुहूर्त)
- व्यापार आरंभ, दुकान का उद्घाटन, निवेश: लाभ या अमृत
- नौकरी-साक्षात्कार, नया अनुबंध, हस्ताक्षर: अमृत, शुभ या लाभ
- यात्रा: चर (साथ ही अमृत, शुभ, लाभ)
- वाहन/स्वर्ण/संपत्ति की खरीद: लाभ या अमृत; पुष्य नक्षत्र हो तो और उत्तम
- विद्या-आरंभ, नई कला: शुभ या लाभ
- औषधि/उपचार आरंभ: अमृत
- दिनचर्या/अपरिहार्य कार्य: उद्वेग सह्य; रोग व काल से बचें
दिन बनाम रात चौघड़िया
दिन के चौघड़िया दिन के कार्यों के लिए और रात के चौघड़िया संध्या व रात्रि कार्यों — जैसे रात्रि यात्रा, विवाह की कुछ रस्में, या देर शाम के अनुष्ठान — के लिए उपयोग होते हैं। दोनों का अपना आठ-गुना क्रम होता है, इसलिए जिस समय कार्य करना हो, उसी (दिन या रात) समूह को देखें। यह भूल आम है कि लोग रात के कार्य के लिए दिन का चौघड़िया देख लेते हैं।
चौघड़िया के साथ राहु काल व अभिजित भी देखें
चौघड़िया अकेले पर्याप्त नहीं — अच्छे चौघड़िया में भी दिन का राहु काल, यमगंड और गुलिक टालना बुद्धिमानी है। इसके विपरीत, मध्याह्न के आसपास का अभिजित मुहूर्त लगभग हर कार्य के लिए शुभ है (कुछ परंपराओं में बुधवार को छोड़कर)। संक्षेप में: शुभ चौघड़िया चुनें, अभिजित का लाभ लें, और राहु काल से बचें। किसी अन्य तिथि की योजना के लिए हमारा मुहूर्त प्लानर यह सब एक साथ दिखाता है।
सामान्य भूलें
पहली भूल — दिन और रात के चौघड़िया को मिला देना। दूसरी — किसी एक निश्चित घड़ी-समय (जैसे "सुबह 9 बजे") को हमेशा शुभ मान लेना, जबकि चौघड़िया वार व शहर के अनुसार बदलता है। तीसरी — केवल चौघड़िया देखकर राहु काल की अनदेखी करना। चौथी — बड़े संस्कारों (विवाह, गृह प्रवेश) के लिए केवल चौघड़िया पर निर्भर रहना; इनके लिए तिथि, नक्षत्र और कुंडली भी देखी जाती है, अतः अंतिम मुहूर्त योग्य पंडित से निश्चित करें।
अभी अपने शहर का चौघड़िया देखें
ऊपर खोज बॉक्स में अपना शहर टाइप करें और आज के दिन-रात के सभी चौघड़िया, उनके सटीक समय सहित देखें। और गहराई के लिए सात चौघड़िया संदर्भ, वार का प्रभाव जानने के लिए वार पृष्ठ, और मूल सिद्धांत के लिए पंचांग गाइड देखें।
चौघड़िया बनाम होरा (ग्रह-होरा)
लोग अक्सर चौघड़िया और होरा को मिला देते हैं, पर ये दो अलग विधियाँ हैं। होरा में दिन-रात के 24 घंटों को 24 होरा में बाँटा जाता है, प्रत्येक लगभग एक घंटे का और सात ग्रहों में से किसी एक द्वारा शासित (सूर्य, शुक्र, बुध, चंद्र, शनि, गुरु, मंगल के क्रम में)। गुरु और चंद्र की होरा धन व शुभ कार्यों हेतु, बुध की विद्या-व्यापार हेतु उत्तम मानी जाती है। चौघड़िया आठ-गुना है और याद रखने में सरल; होरा घंटे-आधारित और अधिक सूक्ष्म है। दैनिक उपयोग में अधिकांश लोग चौघड़िया देखते हैं, जबकि कुछ विशेष कार्यों के लिए होरा भी मिलाकर देखा जाता है।
चौघड़िया की परंपरा व स्रोत
चौघड़िया मुहूर्त-शास्त्र की व्यावहारिक शाखा से आता है, जिसका उद्देश्य आकाशीय समय को दैनिक जीवन में उपयोगी बनाना है। शास्त्रीय ग्रंथों (जैसे मुहूर्त चिंतामणि की परंपरा) में शुभ-अशुभ काल-विभाजन का विस्तृत विवेचन मिलता है। चौघड़िया इसका सरलीकृत, जन-सुलभ रूप है — इसीलिए यह गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के घर-घर में प्रचलित है। यह ज्योतिष का "भविष्यवाणी" वाला अंग नहीं, बल्कि समय-चयन (मुहूर्त) वाला व्यावहारिक अंग है।
क्षेत्रीय व्यवहार
गुजरात व राजस्थान में व्यापारी-वर्ग नई दुकान, बही-खाता या सौदे के लिए लाभ व अमृत चौघड़िया का विशेष ध्यान रखता है। महाराष्ट्र में यात्रा व मांगलिक कार्यों के लिए इसे देखा जाता है। दक्षिण भारत में चौघड़िया की तुलना में राहु कालम् और गुलिक कालम् पर अधिक जोर रहता है, पर सिद्धांत वही है। क्षेत्र चाहे जो हो, अमृत/शुभ/लाभ शुभ और उद्वेग/रोग/काल त्याज्य — यह मूल नियम सर्वत्र समान है।
रोज़मर्रा के विशेष प्रसंगों के लिए चौघड़िया
नया वाहन लाना: लाभ या अमृत चौघड़िया चुनें; यदि पुष्य नक्षत्र या अक्षय तृतीया/धनतेरस हो तो और उत्तम। औषधि या उपचार आरंभ: अमृत श्रेष्ठ है। संपत्ति के कागज़ पर हस्ताक्षर: अमृत, शुभ या लाभ, और राहु काल से बचें। बच्चे का विद्यालय/पढ़ाई आरंभ: शुभ या लाभ, गुरुवार हो तो और शुभ। नई नौकरी का पहला दिन या साक्षात्कार: अमृत, शुभ या लाभ; अभिजित मुहूर्त भी सुरक्षित। गृह-सज्जा/नई वस्तु घर लाना: लाभ या अमृत। इन सभी में स्मरण रहे — शुभ चौघड़िया चुनें, राहु काल टालें, और संदेह हो तो मध्याह्न का अभिजित मुहूर्त लें।
पूरे दिन को पढ़ना: रात का उदाहरण
जैसे दिन के आठ चौघड़िया होते हैं, वैसे ही सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक रात के आठ चौघड़िया होते हैं, जो रात्रि यात्रा या देर-शाम के कार्यों के लिए देखे जाते हैं। मान लीजिए सोमवार को सूर्यास्त 6:00 PM है — सोमवार का पहला रात-चौघड़िया चर है, अतः क्रम बनेगा चर, लाभ, अमृत, काल, शुभ, रोग, उद्वेग, चर (लगभग हर 90 मिनट पर, रात की लंबाई अनुसार)। रात्रि यात्रा के लिए चर या अमृत खंड उत्तम रहेगा। ऊपर अपने शहर का चयन करने पर दिन व रात दोनों के सटीक खंड दिख जाते हैं।
त्वरित जाँच-सूची
- अपने शहर व आज के लिए चौघड़िया देखें (सामान्य सारणी पर निर्भर न रहें)
- कार्य के समय पर चल रहा चौघड़िया पहचानें
- अमृत/शुभ/लाभ = आगे बढ़ें; उद्वेग/रोग/काल = शुभ खंड की प्रतीक्षा करें
- यात्रा के लिए चर भी उत्तम
- राहु काल, यमगंड, गुलिक टालें; अभिजित मुहूर्त का लाभ लें
- बड़े संस्कारों के लिए तिथि-नक्षत्र-कुंडली भी देखें व पंडित से पुष्टि करें
सामान्य प्रश्न
चौघड़िया क्या है?
चौघड़िया ("चार घड़ी", ~90 मिनट) शुभ समय चुनने की सबसे प्रचलित दैनिक विधि है। दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है, हर भाग का एक स्वामी ग्रह और शुभ/सम/अशुभ स्वभाव होता है।
आज का चौघड़िया कैसे देखें?
ऊपर अपना शहर चुनें — उस शहर के आज के दिन व रात के सभी चौघड़िया उनके सटीक समय सहित दिख जाएँगे। जिस घंटे कार्य करना हो, उस पर चल रहा चौघड़िया देखें।
कौन-सा चौघड़िया शुभ है?
अमृत, शुभ और लाभ शुभ हैं; चर सम (यात्रा हेतु शुभ); और उद्वेग, रोग व काल नए कार्य हेतु त्याज्य हैं।
यात्रा हेतु कौन-सा चौघड़िया सर्वोत्तम है?
चर पारंपरिक रूप से यात्रा हेतु सर्वोत्तम है; अमृत, शुभ व लाभ भी उपयुक्त हैं।
व्यापार या खरीद हेतु कौन-सा चौघड़िया?
लाभ सर्वोत्तम है, उसके बाद अमृत। स्वर्ण या वाहन की खरीद पुष्य नक्षत्र के दिन और भी शुभ मानी जाती है।
एक चौघड़िया कितनी देर का होता है?
औसतन लगभग 90 मिनट, पर दिन की लंबाई के अनुसार बदलता है — गर्मियों में दिन के चौघड़िया लंबे, सर्दियों में छोटे।
क्या चौघड़िया हर शहर में अलग होता है?
हाँ — समय शहर के वास्तविक सूर्योदय-सूर्यास्त पर आधारित हैं, इसलिए हर शहर व दिन में बदलते हैं।
दिन व रात चौघड़िया में क्या अंतर है?
दिन चौघड़िया सूर्योदय से सूर्यास्त तक के कार्यों हेतु, रात चौघड़िया सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक के कार्यों हेतु; दोनों के अपने आठ भाग होते हैं।
क्या चौघड़िया हर दिन बदलता है?
हाँ — हर वार का पहला चौघड़िया अलग होता है, इसलिए वही घड़ी का समय अलग-अलग दिन अलग चौघड़िया रखता है।
क्या केवल चौघड़िया पर्याप्त है?
दैनिक कार्यों के लिए हाँ, पर अच्छे चौघड़िया में भी राहु काल टालना चाहिए और अभिजित मुहूर्त का लाभ लेना चाहिए। बड़े संस्कारों हेतु तिथि, नक्षत्र व कुंडली भी देखें।
उद्वेग चौघड़िया में क्या किया जा सकता है?
उद्वेग नए शुभ कार्य हेतु टाला जाता है, पर सरकारी कार्य व दिनचर्या के अपरिहार्य कामों हेतु सह्य माना जाता है।
क्या चौघड़िया के लिए पंडित आवश्यक है?
नहीं — चौघड़िया सरल है और कोई भी इसे स्वयं देख सकता है। विवाह/गृह प्रवेश जैसे बड़े मुहूर्त के लिए पंडित से परामर्श करें।