बैसाखी 2027 Baisakhi
बुधवार, 14 अप्रैल 2027 · mid-April (≈13–14 Apr)
बैसाखी 2027 बुधवार, 14 अप्रैल 2027 को है। यह रबी फसल का आभार तथा समुदाय व आस्था का उत्सव है। सिखों हेतु यह खालसा-जन्म का स्मरण है; उत्तर के किसानों हेतु फसल का आनंदमय समापन। यह हिंदू चंद्र कैलेंडर में मेष संक्रांति (सौर) को पड़ता है।
बैसाखी 2027 तिथि
बुधवार, 14 अप्रैल 2027
बैसाखी — वर्ष अनुसार तिथि
| 2026 | मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 |
| 2027 | बुधवार, 14 अप्रैल 2027 |
| 2028 | गुरुवार, 13 अप्रैल 2028 |
तिथि कई पंचांग स्रोतों से मिलाई गई; क्षेत्रीय रूप से एक दिन का अंतर संभव।
बैसाखी की कथा
बैसाखी पंजाब का वसंत फसल-पर्व है और सिखों हेतु वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में एक — 1699 में इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा की स्थापना की। यह सौर पर्व है जो सूर्य के मेष में प्रवेश पर लगभग 13–14 अप्रैल को पड़ता है।
बैसाखी का महत्व
यह रबी फसल का आभार तथा समुदाय व आस्था का उत्सव है। सिखों हेतु यह खालसा-जन्म का स्मरण है; उत्तर के किसानों हेतु फसल का आनंदमय समापन।
बैसाखी कैसे मनाया जाता है
- गुरुद्वारा दर्शन व कीर्तन
- नगर कीर्तन शोभायात्रा
- फसल मेलों में भांगड़ा व गिद्दा
- लंगर व दान
- सूर्योदय पर नदी-नहर में स्नान
क्षेत्रीय विविधता
पंजाब में वैसाखी, तथा वही सौर मोड़ बंगाल में पोहेला बोइशाख, असम में बोहाग बिहू, तमिलनाडु में पुथांडु व केरल में विशु — एक सौर नववर्ष, अनेक नाम।
बैसाखी के पकवान
बैसाखी पर बनने वाले पारंपरिक व्यंजन: मक्की की रोटी व सरसों का साग, कड़ा प्रसाद, मीठे चावल, लस्सी।
सुझाव
- गुरुद्वारा व लंगर में सम्मिलित हों
- आभार व समुदाय का दिन
बैसाखी पर मुहूर्त
बैसाखी मेष संक्रांति (सौर) को पड़ता है। दिन का शुभ समय चुनने हेतु अपने शहर का मुहूर्त प्लानर खोलें और चौघड़िया व त्यागने योग्य राहु काल देखें। विवाह/गृह प्रवेश हेतु मुहूर्त पंडित से निश्चित करें।
तिथि चंद्र कैलेंडर पर आधारित है और हर वर्ष बदलती है; क्षेत्रीय परंपरा में एक दिन का अंतर संभव — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
सामान्य प्रश्न
बैसाखी 2027 कब है?
बैसाखी 2027 बुधवार, 14 अप्रैल 2027 को है। यह मेष संक्रांति (सौर) को पड़ता है; चंद्र कैलेंडर के कारण ग्रेगोरियन तिथि हर वर्ष बदलती है।
बैसाखी क्यों मनाया जाता है?
बैसाखी पंजाब का वसंत फसल-पर्व है और सिखों हेतु वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में एक — 1699 में इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा की स्थापना की। यह सौर पर्व है जो सूर्य के मेष में प्रवेश पर लगभग 13–14 अप्रैल को पड़ता है।
बैसाखी कैसे मनाया जाता है?
मुख्य विधियाँ: गुरुद्वारा दर्शन व कीर्तन; नगर कीर्तन शोभायात्रा; फसल मेलों में भांगड़ा व गिद्दा; लंगर व दान।
बैसाखी विभिन्न क्षेत्रों में कैसे मनाया जाता है?
पंजाब में वैसाखी, तथा वही सौर मोड़ बंगाल में पोहेला बोइशाख, असम में बोहाग बिहू, तमिलनाडु में पुथांडु व केरल में विशु — एक सौर नववर्ष, अनेक नाम।
बैसाखी पर कौन-से पकवान बनते हैं?
पारंपरिक व्यंजन: मक्की की रोटी व सरसों का साग, कड़ा प्रसाद, मीठे चावल, लस्सी।