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दिवाली Diwali (Lakshmi Puja)

कार्तिक अमावस्या · प्रायः अक्टूबर–नवंबर

त्वरित उत्तर

दिवाली कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है, प्रायः अक्टूबर–नवंबर में। यह अधिकांश हिंदुओं का सबसे बड़ा पर्व है — अंधकार पर प्रकाश व अज्ञान पर ज्ञान की विजय, और समृद्धि, स्वास्थ्य व सौभाग्य का स्वागत।

दिवाली की कथा

दिवाली, दीपों का पर्व, चौदह वर्ष के वनवास व रावण-विजय के बाद भगवान राम की अयोध्या-वापसी का उत्सव है, जब नगर ने दीपों की पंक्तियों से उनका स्वागत किया। यह देवी लक्ष्मी का भी पूजन है, जो कार्तिक अमावस्या की रात स्वच्छ, दीप-प्रज्वलित घरों में पधारती हैं।

दिवाली का महत्व

यह अधिकांश हिंदुओं का सबसे बड़ा पर्व है — अंधकार पर प्रकाश व अज्ञान पर ज्ञान की विजय, और समृद्धि, स्वास्थ्य व सौभाग्य का स्वागत।

दिवाली कैसे मनाया जाता है

  • घर की सफ़ाई व दीप, रोशनी व रंगोली से सजावट
  • अमावस्या संध्या को लक्ष्मी-गणेश पूजा
  • दीप पंक्तियाँ जलाना व (अब कम-शोर) आतिशबाज़ी
  • मिठाई, उपहार व शुभकामनाओं का आदान-प्रदान

क्षेत्रीय विविधता

अनेक व्यापारियों हेतु यह वित्तीय नववर्ष का आरंभ है (चोपड़ा पूजन, गुजरात में बेस्तु वरस); बंगाल में इस रात काली पूजा; दक्षिण में इसे कृष्ण द्वारा नरकासुर-वध (नरक चतुर्दशी) से जोड़ते हैं।

दिवाली के पकवान

दिवाली पर बनने वाले पारंपरिक व्यंजन: मिठाइयों की भरमार — काजू कतली, सोन पापड़ी, लड्डू, चकली, मठरी व नमकीन

सुझाव

  • प्रदोष/शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी पूजा करें
  • पूरे घर को स्वच्छ कर दीप जलाएँ; पर्यावरण-अनुकूल उत्सव को वरीयता दें

दिवाली पर मुहूर्त

दिवाली कार्तिक अमावस्या को पड़ता है। दिन का शुभ समय चुनने हेतु अपने शहर का मुहूर्त प्लानर खोलें और चौघड़िया व त्यागने योग्य राहु काल देखें। विवाह/गृह प्रवेश हेतु मुहूर्त पंडित से निश्चित करें।

तिथि चंद्र कैलेंडर पर आधारित है और हर वर्ष बदलती है; क्षेत्रीय परंपरा में एक दिन का अंतर संभव — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

सामान्य प्रश्न

दिवाली कब मनाया जाता है?

दिवाली हिंदू चंद्र कैलेंडर में कार्तिक अमावस्या को पड़ता है, जो प्रायः अक्टूबर–नवंबर में आता है। सटीक तिथि हर वर्ष बदलती है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

दिवाली क्यों मनाया जाता है?

दिवाली, दीपों का पर्व, चौदह वर्ष के वनवास व रावण-विजय के बाद भगवान राम की अयोध्या-वापसी का उत्सव है, जब नगर ने दीपों की पंक्तियों से उनका स्वागत किया। यह देवी लक्ष्मी का भी पूजन है, जो कार्तिक अमावस्या की रात स्वच्छ, दीप-प्रज्वलित घरों में पधारती हैं।

दिवाली कैसे मनाया जाता है?

मुख्य विधियाँ: घर की सफ़ाई व दीप, रोशनी व रंगोली से सजावट; अमावस्या संध्या को लक्ष्मी-गणेश पूजा; दीप पंक्तियाँ जलाना व (अब कम-शोर) आतिशबाज़ी; मिठाई, उपहार व शुभकामनाओं का आदान-प्रदान।

दिवाली विभिन्न क्षेत्रों में कैसे मनाया जाता है?

अनेक व्यापारियों हेतु यह वित्तीय नववर्ष का आरंभ है (चोपड़ा पूजन, गुजरात में बेस्तु वरस); बंगाल में इस रात काली पूजा; दक्षिण में इसे कृष्ण द्वारा नरकासुर-वध (नरक चतुर्दशी) से जोड़ते हैं।

दिवाली पर कौन-से पकवान बनते हैं?

पारंपरिक व्यंजन: मिठाइयों की भरमार — काजू कतली, सोन पापड़ी, लड्डू, चकली, मठरी व नमकीन।