हरतालिका तीज 2027 Hartalika Teej
शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 · अगस्त–सितंबर
हरतालिका तीज 2027 शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 को है। विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु व कल्याण हेतु, अविवाहित सुयोग्य वर हेतु व्रत रखती हैं। यह कठिनतम व्रतों में है — बिना अन्न-जल, प्रायः रात्रि भर। यह हिंदू चंद्र कैलेंडर में भाद्रपद शुक्ल तृतीया को पड़ता है।
हरतालिका तीज 2027 तिथि
शुक्रवार, 3 सितंबर 2027
हरतालिका तीज — वर्ष अनुसार तिथि
| 2026 | सोमवार, 14 सितंबर 2026 |
| 2027 | शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 |
| 2028 | मंगलवार, 22 अगस्त 2028 |
तिथि कई पंचांग स्रोतों से मिलाई गई; क्षेत्रीय रूप से एक दिन का अंतर संभव।
हरतालिका तीज की कथा
हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को आती है, जब स्त्रियाँ शिव-पार्वती हेतु निर्जला व्रत रखती हैं। नाम इस कथा से है कि पार्वती की सखियाँ उन्हें वन में हर ले गईं (आलिका) ताकि वे तप से शिव को पा सकें।
हरतालिका तीज का महत्व
विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु व कल्याण हेतु, अविवाहित सुयोग्य वर हेतु व्रत रखती हैं। यह कठिनतम व्रतों में है — बिना अन्न-जल, प्रायः रात्रि भर।
हरतालिका तीज कैसे मनाया जाता है
- निर्जला व्रत, प्रायः रात्रि भर
- शिव, पार्वती व गणेश की मिट्टी-मूर्ति बनाकर पूजन
- भजन व हरतालिका व्रत कथा सहित रात्रि जागरण
- हरे वस्त्र, चूड़ियाँ, मेहंदी व सोलह शृंगार
- अगले प्रातः पूजन के बाद पारण
क्षेत्रीय विविधता
उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान व हिंदी-पट्टी में व्यापक, नेपाल में तीज रूप में; महाराष्ट्र व दक्षिण में संबंधित हरितालिका।
हरतालिका तीज के पकवान
हरतालिका तीज पर बनने वाले पारंपरिक व्यंजन: पारण पर फल, नारियल, तथा घेवर व खीर जैसे पर्व-व्यंजन।
सुझाव
- निर्जला व्रत — एक रात पूर्व सात्विक भोजन करें
- शिव-पार्वती की मिट्टी-मूर्ति केंद्र में
हरतालिका तीज पर मुहूर्त
हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को पड़ता है। दिन का शुभ समय चुनने हेतु अपने शहर का मुहूर्त प्लानर खोलें और चौघड़िया व त्यागने योग्य राहु काल देखें। विवाह/गृह प्रवेश हेतु मुहूर्त पंडित से निश्चित करें।
तिथि चंद्र कैलेंडर पर आधारित है और हर वर्ष बदलती है; क्षेत्रीय परंपरा में एक दिन का अंतर संभव — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
सामान्य प्रश्न
हरतालिका तीज 2027 कब है?
हरतालिका तीज 2027 शुक्रवार, 3 सितंबर 2027 को है। यह भाद्रपद शुक्ल तृतीया को पड़ता है; चंद्र कैलेंडर के कारण ग्रेगोरियन तिथि हर वर्ष बदलती है।
हरतालिका तीज क्यों मनाया जाता है?
हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को आती है, जब स्त्रियाँ शिव-पार्वती हेतु निर्जला व्रत रखती हैं। नाम इस कथा से है कि पार्वती की सखियाँ उन्हें वन में हर ले गईं (आलिका) ताकि वे तप से शिव को पा सकें।
हरतालिका तीज कैसे मनाया जाता है?
मुख्य विधियाँ: निर्जला व्रत, प्रायः रात्रि भर; शिव, पार्वती व गणेश की मिट्टी-मूर्ति बनाकर पूजन; भजन व हरतालिका व्रत कथा सहित रात्रि जागरण; हरे वस्त्र, चूड़ियाँ, मेहंदी व सोलह शृंगार।
हरतालिका तीज विभिन्न क्षेत्रों में कैसे मनाया जाता है?
उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान व हिंदी-पट्टी में व्यापक, नेपाल में तीज रूप में; महाराष्ट्र व दक्षिण में संबंधित हरितालिका।
हरतालिका तीज पर कौन-से पकवान बनते हैं?
पारंपरिक व्यंजन: पारण पर फल, नारियल, तथा घेवर व खीर जैसे पर्व-व्यंजन।