होली 2027 Holi (Holika Dahan)
सोमवार, 22 मार्च 2027 · मार्च
होली 2027 सोमवार, 22 मार्च 2027 को है। यह वसंत के आगमन व शुद्धि की रात है, जब होलिका की अग्नि नकारात्मकता को भस्म करती है। अगले दिन के रंग आयु, जाति व स्तर की दीवारें मिटा देते हैं। यह हिंदू चंद्र कैलेंडर में फाल्गुन पूर्णिमा को पड़ता है।
होली 2027 तिथि
सोमवार, 22 मार्च 2027
होली — वर्ष अनुसार तिथि
| 2026 | बुधवार, 4 मार्च 2026 |
| 2027 | सोमवार, 22 मार्च 2027 |
| 2028 | शुक्रवार, 10 मार्च 2028 |
पर्व के दिन (2027)
| Holika Dahan | रविवार, 21 मार्च 2027 |
| Holi (Rangwali) | सोमवार, 22 मार्च 2027 |
तिथि कई पंचांग स्रोतों से मिलाई गई; क्षेत्रीय रूप से एक दिन का अंतर संभव।
होली की कथा
होली भक्ति व अच्छाई की विजय का पर्व है। इसकी पूर्व संध्या होलिका दहन राक्षसी होलिका की कथा से जुड़ी है, जिसने भक्त प्रह्लाद को जलाना चाहा पर स्वयं भस्म हो गई, जबकि विष्णु-कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे। अगले दिन के रंग कृष्ण-राधा की लीला का स्मरण कराते हैं।
होली का महत्व
यह वसंत के आगमन व शुद्धि की रात है, जब होलिका की अग्नि नकारात्मकता को भस्म करती है। अगले दिन के रंग आयु, जाति व स्तर की दीवारें मिटा देते हैं।
होली कैसे मनाया जाता है
- फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन व परिक्रमा
- अग्नि में अन्न, नारियल व नई फसल अर्पित करना
- अगली सुबह गुलाल व रंगों से खेलना (धुलंडी)
- गीत-नृत्य व मिठाई-ठंडाई का आदान-प्रदान
क्षेत्रीय विविधता
ब्रज (मथुरा, वृंदावन, बरसाना) की लठमार होली प्रसिद्ध है; बंगाल में दोल जात्रा/बसंत उत्सव; पूरे उत्तर भारत में भव्य, दक्षिण में अपेक्षाकृत सौम्य।
होली के पकवान
होली पर बनने वाले पारंपरिक व्यंजन: गुझिया, ठंडाई, मालपुआ, दही भल्ला, पूरन पोली।
सुझाव
- पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर होलिका दहन में सम्मिलित हों
- अगले दिन त्वचा-सुरक्षित, प्राकृतिक रंगों से खेलें
होली पर मुहूर्त
होली फाल्गुन पूर्णिमा को पड़ता है। दिन का शुभ समय चुनने हेतु अपने शहर का मुहूर्त प्लानर खोलें और चौघड़िया व त्यागने योग्य राहु काल देखें। विवाह/गृह प्रवेश हेतु मुहूर्त पंडित से निश्चित करें।
तिथि चंद्र कैलेंडर पर आधारित है और हर वर्ष बदलती है; क्षेत्रीय परंपरा में एक दिन का अंतर संभव — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
सामान्य प्रश्न
होली 2027 कब है?
होली 2027 सोमवार, 22 मार्च 2027 को है। यह फाल्गुन पूर्णिमा को पड़ता है; चंद्र कैलेंडर के कारण ग्रेगोरियन तिथि हर वर्ष बदलती है।
होली क्यों मनाया जाता है?
होली भक्ति व अच्छाई की विजय का पर्व है। इसकी पूर्व संध्या होलिका दहन राक्षसी होलिका की कथा से जुड़ी है, जिसने भक्त प्रह्लाद को जलाना चाहा पर स्वयं भस्म हो गई, जबकि विष्णु-कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे। अगले दिन के रंग कृष्ण-राधा की लीला का स्मरण कराते हैं।
होली कैसे मनाया जाता है?
मुख्य विधियाँ: फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन व परिक्रमा; अग्नि में अन्न, नारियल व नई फसल अर्पित करना; अगली सुबह गुलाल व रंगों से खेलना (धुलंडी); गीत-नृत्य व मिठाई-ठंडाई का आदान-प्रदान।
होली विभिन्न क्षेत्रों में कैसे मनाया जाता है?
ब्रज (मथुरा, वृंदावन, बरसाना) की लठमार होली प्रसिद्ध है; बंगाल में दोल जात्रा/बसंत उत्सव; पूरे उत्तर भारत में भव्य, दक्षिण में अपेक्षाकृत सौम्य।
होली पर कौन-से पकवान बनते हैं?
पारंपरिक व्यंजन: गुझिया, ठंडाई, मालपुआ, दही भल्ला, पूरन पोली।