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कृष्ण जन्माष्टमी 2027 Krishna Janmashtami

बुधवार, 25 अगस्त 2027 · अगस्त–सितंबर

त्वरित उत्तर

कृष्ण जन्माष्टमी 2027 बुधवार, 25 अगस्त 2027 को है। यह सबसे बड़े वैष्णव पर्वों में है, जो कृष्ण को गीता के उपदेष्टा तथा दिव्य प्रेम व लीला के मूर्त रूप में मनाता है। यह हिंदू चंद्र कैलेंडर में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को पड़ता है।

कृष्ण जन्माष्टमी 2027 तिथि

बुधवार, 25 अगस्त 2027

कृष्ण जन्माष्टमी — वर्ष अनुसार तिथि

2026शुक्रवार, 4 सितंबर 2026
2027बुधवार, 25 अगस्त 2027
2028शनिवार, 12 अगस्त 2028

तिथि कई पंचांग स्रोतों से मिलाई गई; क्षेत्रीय रूप से एक दिन का अंतर संभव।

कृष्ण जन्माष्टमी की कथा

जन्माष्टमी भगवान कृष्ण — विष्णु के आठवें अवतार — के जन्म का उत्सव है, जो मथुरा के कारागार में देवकी व वसुदेव के यहाँ अर्धरात्रि को कंस के अत्याचार का अंत करने हेतु जन्मे। उसी रात वसुदेव शिशु को यमुना पार गोकुल ले गए।

कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

यह सबसे बड़े वैष्णव पर्वों में है, जो कृष्ण को गीता के उपदेष्टा तथा दिव्य प्रेम व लीला के मूर्त रूप में मनाता है।

कृष्ण जन्माष्टमी कैसे मनाया जाता है

  • दिनभर उपवास, अर्धरात्रि कृष्ण-जन्म के बाद पारण
  • अर्धरात्रि शिशु कृष्ण का अभिषेक व झूला झुलाना
  • भजन, गीता पाठ व कृष्ण-लीला की झांकियाँ
  • दही हांडी — ऊँची मटकी फोड़ना, कृष्ण की माखनचोरी का स्मरण

क्षेत्रीय विविधता

मथुरा-वृंदावन में सबसे भव्य; महाराष्ट्र की दही हांडी मानव-मीनार प्रसिद्ध; गुजरात, ओडिशा व दक्षिण अपने-अपने रूप में मनाते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी के पकवान

कृष्ण जन्माष्टमी पर बनने वाले पारंपरिक व्यंजन: माखन-मिश्री, पंजीरी, धनिया पंजीरी, चरणामृत व छप्पन भोग।

सुझाव

  • उपवास रखें और अर्धरात्रि जन्म को भजनों सहित मनाएँ
  • बाल कृष्ण को माखन-मिश्री अर्पित कर झूला झुलाएँ

कृष्ण जन्माष्टमी पर मुहूर्त

कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को पड़ता है। दिन का शुभ समय चुनने हेतु अपने शहर का मुहूर्त प्लानर खोलें और चौघड़िया व त्यागने योग्य राहु काल देखें। विवाह/गृह प्रवेश हेतु मुहूर्त पंडित से निश्चित करें।

तिथि चंद्र कैलेंडर पर आधारित है और हर वर्ष बदलती है; क्षेत्रीय परंपरा में एक दिन का अंतर संभव — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

सामान्य प्रश्न

कृष्ण जन्माष्टमी 2027 कब है?

कृष्ण जन्माष्टमी 2027 बुधवार, 25 अगस्त 2027 को है। यह भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को पड़ता है; चंद्र कैलेंडर के कारण ग्रेगोरियन तिथि हर वर्ष बदलती है।

कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाया जाता है?

जन्माष्टमी भगवान कृष्ण — विष्णु के आठवें अवतार — के जन्म का उत्सव है, जो मथुरा के कारागार में देवकी व वसुदेव के यहाँ अर्धरात्रि को कंस के अत्याचार का अंत करने हेतु जन्मे। उसी रात वसुदेव शिशु को यमुना पार गोकुल ले गए।

कृष्ण जन्माष्टमी कैसे मनाया जाता है?

मुख्य विधियाँ: दिनभर उपवास, अर्धरात्रि कृष्ण-जन्म के बाद पारण; अर्धरात्रि शिशु कृष्ण का अभिषेक व झूला झुलाना; भजन, गीता पाठ व कृष्ण-लीला की झांकियाँ; दही हांडी — ऊँची मटकी फोड़ना, कृष्ण की माखनचोरी का स्मरण।

कृष्ण जन्माष्टमी विभिन्न क्षेत्रों में कैसे मनाया जाता है?

मथुरा-वृंदावन में सबसे भव्य; महाराष्ट्र की दही हांडी मानव-मीनार प्रसिद्ध; गुजरात, ओडिशा व दक्षिण अपने-अपने रूप में मनाते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी पर कौन-से पकवान बनते हैं?

पारंपरिक व्यंजन: माखन-मिश्री, पंजीरी, धनिया पंजीरी, चरणामृत व छप्पन भोग।