मकर संक्रांति Makar Sankranti
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश · प्रायः मध्य जनवरी (~14 जनवरी)
मकर संक्रांति सूर्य का मकर राशि में प्रवेश को मनाया जाता है, प्रायः मध्य जनवरी (~14 जनवरी) में। यह फसल का आभार-पर्व और सौर नववर्ष है। उत्तरायण को आध्यात्मिक साधना व शुभ कार्यों हेतु शुभ माना जाता है, और इस दिन पवित्र स्नान पुण्यदायी माना जाता है।
मकर संक्रांति की कथा
मकर संक्रांति उस दिन को दर्शाती है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण आरंभ करता है — अंधकार से प्रकाश की ओर मोड़। यह उन गिने-चुने हिंदू पर्वों में है जो सौर कैलेंडर पर आधारित है, इसलिए यह प्रायः 14 जनवरी को पड़ता है।
मकर संक्रांति का महत्व
यह फसल का आभार-पर्व और सौर नववर्ष है। उत्तरायण को आध्यात्मिक साधना व शुभ कार्यों हेतु शुभ माना जाता है, और इस दिन पवित्र स्नान पुण्यदायी माना जाता है।
मकर संक्रांति कैसे मनाया जाता है
- सूर्योदय पर गंगा, यमुना या गोदावरी में पवित्र स्नान
- सूर्य को अर्घ्य देना और सूर्य मंत्रों का जाप
- तिल-गुड़ के व्यंजन बनाकर बाँटना
- पतंगबाज़ी, विशेषकर गुजरात व राजस्थान में
- खिचड़ी, तिल, कंबल व भोजन का दान
क्षेत्रीय विविधता
यह तमिलनाडु में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण (पतंग पर्व), पंजाब में माघी, असम में बिहू और बंगाल में पौष संक्रांति है — एक ही सौर घटना, अनेक क्षेत्रीय उत्सव।
मकर संक्रांति के पकवान
मकर संक्रांति पर बनने वाले पारंपरिक व्यंजन: तिल-गुड़ लड्डू व चिक्की, गजक, खिचड़ी, पोंगल, पूरन पोली।
सुझाव
- सूर्योदय पर स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दें
- तिल-गुड़ बाँटें और गर्म वस्त्र/भोजन दान करें
मकर संक्रांति पर मुहूर्त
मकर संक्रांति सूर्य का मकर राशि में प्रवेश को पड़ता है। दिन का शुभ समय चुनने हेतु अपने शहर का मुहूर्त प्लानर खोलें और चौघड़िया व त्यागने योग्य राहु काल देखें। विवाह/गृह प्रवेश हेतु मुहूर्त पंडित से निश्चित करें।
तिथि चंद्र कैलेंडर पर आधारित है और हर वर्ष बदलती है; क्षेत्रीय परंपरा में एक दिन का अंतर संभव — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
सामान्य प्रश्न
मकर संक्रांति कब मनाया जाता है?
मकर संक्रांति हिंदू चंद्र कैलेंडर में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश को पड़ता है, जो प्रायः मध्य जनवरी (~14 जनवरी) में आता है। सटीक तिथि हर वर्ष बदलती है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
मकर संक्रांति क्यों मनाया जाता है?
मकर संक्रांति उस दिन को दर्शाती है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण आरंभ करता है — अंधकार से प्रकाश की ओर मोड़। यह उन गिने-चुने हिंदू पर्वों में है जो सौर कैलेंडर पर आधारित है, इसलिए यह प्रायः 14 जनवरी को पड़ता है।
मकर संक्रांति कैसे मनाया जाता है?
मुख्य विधियाँ: सूर्योदय पर गंगा, यमुना या गोदावरी में पवित्र स्नान; सूर्य को अर्घ्य देना और सूर्य मंत्रों का जाप; तिल-गुड़ के व्यंजन बनाकर बाँटना; पतंगबाज़ी, विशेषकर गुजरात व राजस्थान में।
मकर संक्रांति विभिन्न क्षेत्रों में कैसे मनाया जाता है?
यह तमिलनाडु में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण (पतंग पर्व), पंजाब में माघी, असम में बिहू और बंगाल में पौष संक्रांति है — एक ही सौर घटना, अनेक क्षेत्रीय उत्सव।
मकर संक्रांति पर कौन-से पकवान बनते हैं?
पारंपरिक व्यंजन: तिल-गुड़ लड्डू व चिक्की, गजक, खिचड़ी, पोंगल, पूरन पोली।