उगादि 2027 Ugadi
बुधवार, 7 अप्रैल 2027 · मार्च–अप्रैल
उगादि 2027 बुधवार, 7 अप्रैल 2027 को है। दिन का प्रतीक उगादि पच्चड़ी है — नीम (कटु), गुड़ (मधुर), कच्चा आम (तीखा), इमली (खट्टा), नमक व मिर्च के छह स्वाद — यह स्वीकारते हुए खाया जाता है कि वर्ष सुख-दुख साथ लाएगा। नए आरंभ हेतु अति शुभ दिन। यह हिंदू चंद्र कैलेंडर में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को पड़ता है।
उगादि 2027 तिथि
बुधवार, 7 अप्रैल 2027
उगादि — वर्ष अनुसार तिथि
| 2026 | गुरुवार, 19 मार्च 2026 |
| 2027 | बुधवार, 7 अप्रैल 2027 |
तिथि कई पंचांग स्रोतों से मिलाई गई; क्षेत्रीय रूप से एक दिन का अंतर संभव।
उगादि की कथा
उगादि (युगादि, युग का आरंभ) तेलुगु व कन्नड़ नववर्ष है — चैत्र का प्रथम दिन। यह नए संवत्सर का स्वागत करता है, और मंदिरों में वर्ष का पंचांग श्रवण (आगामी वर्ष का फल) सुना जाता है।
उगादि का महत्व
दिन का प्रतीक उगादि पच्चड़ी है — नीम (कटु), गुड़ (मधुर), कच्चा आम (तीखा), इमली (खट्टा), नमक व मिर्च के छह स्वाद — यह स्वीकारते हुए खाया जाता है कि वर्ष सुख-दुख साथ लाएगा। नए आरंभ हेतु अति शुभ दिन।
उगादि कैसे मनाया जाता है
- सूर्योदय पूर्व तैल-स्नान व नए वस्त्र
- छह स्वादों की उगादि पच्चड़ी
- आम-पत्र तोरण व रंगोली (मुग्गु)
- नववर्ष हेतु पंचांग श्रवण
- मंदिर दर्शन व सहभोज
क्षेत्रीय विविधता
आंध्र, तेलंगाना व कर्नाटक में उगादि, महाराष्ट्र में उसी तिथि को गुड़ी पड़वा, तथा कोंकणी व सिंधी नववर्ष के निकट — दक्कन भर एक चंद्र नववर्ष।
उगादि के पकवान
उगादि पर बनने वाले पारंपरिक व्यंजन: उगादि पच्चड़ी, बोब्बाट्लू/होलिगे, पुलिहोरा, आम पच्चड़ी।
सुझाव
- पच्चड़ी के छहों स्वाद चखें
- उद्यम व खरीद आरंभ हेतु शुभ दिन
उगादि पर मुहूर्त
उगादि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को पड़ता है। दिन का शुभ समय चुनने हेतु अपने शहर का मुहूर्त प्लानर खोलें और चौघड़िया व त्यागने योग्य राहु काल देखें। विवाह/गृह प्रवेश हेतु मुहूर्त पंडित से निश्चित करें।
तिथि चंद्र कैलेंडर पर आधारित है और हर वर्ष बदलती है; क्षेत्रीय परंपरा में एक दिन का अंतर संभव — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
सामान्य प्रश्न
उगादि 2027 कब है?
उगादि 2027 बुधवार, 7 अप्रैल 2027 को है। यह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को पड़ता है; चंद्र कैलेंडर के कारण ग्रेगोरियन तिथि हर वर्ष बदलती है।
उगादि क्यों मनाया जाता है?
उगादि (युगादि, युग का आरंभ) तेलुगु व कन्नड़ नववर्ष है — चैत्र का प्रथम दिन। यह नए संवत्सर का स्वागत करता है, और मंदिरों में वर्ष का पंचांग श्रवण (आगामी वर्ष का फल) सुना जाता है।
उगादि कैसे मनाया जाता है?
मुख्य विधियाँ: सूर्योदय पूर्व तैल-स्नान व नए वस्त्र; छह स्वादों की उगादि पच्चड़ी; आम-पत्र तोरण व रंगोली (मुग्गु); नववर्ष हेतु पंचांग श्रवण।
उगादि विभिन्न क्षेत्रों में कैसे मनाया जाता है?
आंध्र, तेलंगाना व कर्नाटक में उगादि, महाराष्ट्र में उसी तिथि को गुड़ी पड़वा, तथा कोंकणी व सिंधी नववर्ष के निकट — दक्कन भर एक चंद्र नववर्ष।
उगादि पर कौन-से पकवान बनते हैं?
पारंपरिक व्यंजन: उगादि पच्चड़ी, बोब्बाट्लू/होलिगे, पुलिहोरा, आम पच्चड़ी।