रोहिणी नक्षत्र Rohini
4वाँ नक्षत्र — अधिष्ठाता ब्रह्मा (प्रजापति), स्वामी चंद्र, वृषभ में।
रोहिणी (Rohini) 27 नक्षत्रों में 4वाँ है, जो वृषभ में फैला है। इसका स्वामी ग्रह चंद्र, अधिष्ठाता देव ब्रह्मा (प्रजापति), और प्रतीक रथ / गाड़ी है। मनुष्य गण व सर्प योनि वाला रोहिणी पारंपरिक रूप से वृद्धि, रोपण, प्रेम, कला और विलासिता हेतु शुभ माना जाता है। इसमें जन्मे शिशुओं का नाम O, Va, Vi, Vu अक्षरों से रखा जाता है।
मुख्य बातें
- स्वामी चंद्र, देवता ब्रह्मा (प्रजापति), प्रतीक रथ / गाड़ी।
- राशि: वृषभ; मनुष्य गण, कफ (अंत्य) नाड़ी, सर्प योनि।
- वृद्धि, रोपण, प्रेम, कला और विलासिता हेतु शुभ।
- नामाक्षर: O, Va, Vi, Vu (हर पाद हेतु एक)।
रोहिणी नक्षत्र — एक दृष्टि में
| अधिष्ठाता देव | ब्रह्मा (प्रजापति) |
| प्रतीक | रथ / गाड़ी |
| स्वामी ग्रह | चंद्र |
| गण | मनुष्य |
| नाड़ी | कफ (अंत्य) |
| योनि | सर्प |
| राशि | वृषभ |
| नामाक्षर | O, Va, Vi, Vu |
| क्रमांक | 4 / 27 |
रोहिणी का प्रतीक व अर्थ
रोहिणी का प्रतीक रथ / गाड़ी है। रथ या गाड़ी वृद्धि, उर्वरता और समृद्धि के वहन का प्रतीक है। यह प्रतीक नक्षत्र का सार दर्शाता है और इसमें जन्मे व्यक्तियों के स्वभाव को आकार देता है।
अधिष्ठाता देव: ब्रह्मा (प्रजापति)
इसके देवता ब्रह्मा (प्रजापति) सृजनशीलता व भौतिक वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। रोहिणी से जुड़े अनुष्ठानों व उपायों में ब्रह्मा (प्रजापति) का आवाहन केंद्रीय है।
स्वामी ग्रह: चंद्र
चंद्र द्वारा शासित, यह इंद्रिय-प्रिय, कलात्मक और सौंदर्य व सुख की ओर आकृष्ट है। चंद्र की दशा (ग्रह-अवधि) व्यक्ति के जीवन में रोहिणी के भावों को सर्वाधिक प्रबल करती है।
गण, नाड़ी व योनि
रोहिणी मनुष्य गण का है — मानवीय, संतुलित स्वभाव — कफ (अंत्य) नाड़ी व सर्प योनि सहित। ये तीनों वर्गीकरण वैदिक गुण मिलान में उपयोग होते हैं: गण स्वभाव मापता है, नाड़ी स्वास्थ्य व संतान से, और योनि सहज अनुकूलता से जुड़ी है।
व्यक्तित्व व स्वभाव
रोहिणी से प्रबल रूप से प्रभावित व्यक्ति पारंपरिक रूप से आकर्षक, मोहक, कलात्मक और भौतिक रूप से समृद्ध, किंतु कभी-कभी अधिकार-भावना लिए होते हैं। सभी नक्षत्रों की भाँति, इसका सटीक स्वरूप पाद, राशि व संपूर्ण जन्म-कुंडली पर निर्भर करता है।
व्यवसाय व वृत्ति
रोहिणी पारंपरिक रूप से कृषि, कला, फैशन, भोजन, वित्त तथा सृजनात्मक या विलासिता-संबंधी कार्य में सफलता से जुड़ा है। चंद्र की प्रेरणा व ब्रह्मा (प्रजापति) के गुण इन वृत्तियों की ओर संकेत करते हैं, यद्यपि संपूर्ण कुंडली-विश्लेषण चित्र को और स्पष्ट करता है।
शक्तियाँ व चुनौतियाँ
शक्तियाँ: आकर्षण, सृजनशीलता, स्थिरता और पोषक स्नेह। चुनौतियाँ: अधिकार-भावना, भौतिकता और हठी आसक्ति। दोनों की जागरूकता व्यक्ति को रोहिणी की ऊर्जा के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसके साथ कार्य करने में सहायता करती है।
रोहिणी की विवाह अनुकूलता (योनि)
वैदिक गुण मिलान में रोहिणी की सर्प योनि है — साझेदारों के बीच सहज अनुकूलता मापने वाला पशु-प्रतीक (योनि कूट)। समान या मित्र योनियाँ अच्छा अंक पाती हैं, जबकि सर्प पारंपरिक रूप से नेवला योनि से सर्वाधिक विरोध रखती है, अतः ऐसे मिलान को अधिक ध्यान से देखा जाता है। योनि आठ कूटों में से एक है; संपूर्ण गुण मिलान में गण, नाड़ी, वर्ण आदि भी तौले जाते हैं और कुल अंक किसी एक कारक से अधिक महत्वपूर्ण होता है।
रोहिणी के चार पाद
प्रत्येक नक्षत्र चार पादों (3°20′ प्रत्येक) में बँटा है, और हर पाद एक भिन्न नवांश (D9) राशि में पड़ता है जो उसके स्वभाव को सूक्ष्म रूप से रंगती है और नामकरण में शिशु का नामाक्षर देती है। जन्म तिथि, समय व स्थान से सटीक पाद जानने हेतु जन्म नक्षत्र कैलकुलेटर का उपयोग करें।
| पाद | नवांश राशि | नामाक्षर |
|---|---|---|
| पाद 1 | मेष | O |
| पाद 2 | वृषभ | Va |
| पाद 3 | मिथुन | Vi |
| पाद 4 | कर्क | Vu |
शुभ कार्य
जब चंद्रमा रोहिणी में हो, तो दिन पारंपरिक रूप से वृद्धि, रोपण, प्रेम, कला और विलासिता हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त चुनते समय नक्षत्र को शुभ चौघड़िया व तिथि के साथ मिलाएँ और राहु काल से बचें।
रोहिणी हेतु रत्न, मंत्र व उपाय
चूँकि रोहिणी का स्वामी चंद्र है, इसके उपाय मुख्यतः इसी ग्रह के माध्यम से कार्य करते हैं। पारंपरिक सहायक अभ्यासों में ब्रह्मा व कृष्ण की पूजा; चंद्र के उपाय जैसे दूध अर्पण व श्वेत धारण सम्मिलित हैं।
| स्वामी ग्रह | चंद्र |
| रत्न | मोती |
| धातु | चाँदी |
| बीज मंत्र | ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः |
| उपाय हेतु दिन | सोमवार |
| पूज्य देवता | शिव / चंद्र |
रत्न (ज्योतिष रत्न) योग्य ज्योतिषी से परामर्श के बाद ही धारण करें — ग़लत या अति-प्रबल रत्न हानिकारक हो सकता है। बीज मंत्र का जाप व देवता की पूजा सभी के लिए सुरक्षित है।
पंचांग में रोहिणी
चंद्रमा लगभग एक दिन रोहिणी में रहता है। सूर्योदय के समय जो नक्षत्र हो वही हर शहर के दैनिक पंचांग में दिखता है और मुहूर्त हेतु उपयोग होता है। सभी 27 नक्षत्र, तिथियाँ व वार जानें, या संपूर्ण पंचांग गाइड पढ़ें।
नक्षत्र गुण पारंपरिक वैदिक (ज्योतिष) स्रोतों पर आधारित हैं और सीखने हेतु दिए गए हैं, भविष्यवाणी हेतु नहीं; व्यक्तिगत मार्गदर्शन हेतु योग्य ज्योतिषी से परामर्श करें।
सामान्य प्रश्न
रोहिणी नक्षत्र के स्वामी ग्रह व देवता कौन हैं?
रोहिणी का स्वामी ग्रह चंद्र है और अधिष्ठाता देव ब्रह्मा (प्रजापति) हैं। इसका प्रतीक रथ / गाड़ी है और यह मनुष्य गण का है।
रोहिणी नक्षत्र किस राशि में आता है?
रोहिणी वृषभ में आता है। प्रत्येक नक्षत्र 13°20′ का होने से कुछ नक्षत्र दो राशियों में फैलते हैं, अलग-अलग पादों के लिए।
रोहिणी नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
रोहिणी में जन्मे बच्चों का नाम पारंपरिक रूप से O, Va, Vi, Vu से आरंभ होता है — हर पाद के लिए एक अक्षर। सटीक पाद जानने हेतु जन्म नक्षत्र कैलकुलेटर का उपयोग करें।
क्या रोहिणी नक्षत्र शुभ है या अशुभ?
कोई नक्षत्र मात्र "शुभ" या "अशुभ" नहीं होता। रोहिणी चंद्र व ब्रह्मा (प्रजापति) के गुण लिए है, जो इसे विशेषकर वृद्धि, रोपण, प्रेम, कला और विलासिता हेतु शुभ बनाते हैं। हर नक्षत्र की अपनी शक्तियाँ व चुनौतियाँ होती हैं।
रोहिणी नक्षत्र हेतु कौन-से व्यवसाय उपयुक्त हैं?
रोहिणी से प्रभावित व्यक्ति पारंपरिक रूप से कृषि, कला, फैशन, भोजन, वित्त तथा सृजनात्मक या विलासिता-संबंधी कार्य की ओर आकृष्ट होते हैं।
रोहिणी का गण व नाड़ी क्या है?
रोहिणी मनुष्य गण व कफ (अंत्य) नाड़ी का है, सर्प इसकी योनि है — सभी वैदिक गुण मिलान में उपयोग होते हैं।