श्रवण नक्षत्र Shravana
22वाँ नक्षत्र — अधिष्ठाता विष्णु, स्वामी चंद्र, मकर में।
श्रवण (Shravana) 27 नक्षत्रों में 22वाँ है, जो मकर में फैला है। इसका स्वामी ग्रह चंद्र, अधिष्ठाता देव विष्णु, और प्रतीक कान / तीन पदचिह्न है। देव गण व वानर योनि वाला श्रवण पारंपरिक रूप से अध्ययन, श्रवण और ज्ञान हेतु शुभ माना जाता है। इसमें जन्मे शिशुओं का नाम Khi, Khu, Khe, Kho अक्षरों से रखा जाता है।
मुख्य बातें
- स्वामी चंद्र, देवता विष्णु, प्रतीक कान / तीन पदचिह्न।
- राशि: मकर; देव गण, कफ (अंत्य) नाड़ी, वानर योनि।
- अध्ययन, श्रवण और ज्ञान हेतु शुभ।
- नामाक्षर: Khi, Khu, Khe, Kho (हर पाद हेतु एक)।
श्रवण नक्षत्र — एक दृष्टि में
| अधिष्ठाता देव | विष्णु |
| प्रतीक | कान / तीन पदचिह्न |
| स्वामी ग्रह | चंद्र |
| गण | देव |
| नाड़ी | कफ (अंत्य) |
| योनि | वानर |
| राशि | मकर |
| नामाक्षर | Khi, Khu, Khe, Kho |
| क्रमांक | 22 / 27 |
श्रवण का प्रतीक व अर्थ
श्रवण का प्रतीक कान / तीन पदचिह्न है। कान व तीन पदचिह्न श्रवण, विद्या और विष्णु के तीनों लोकों में त्रिविक्रम को दर्शाते हैं। यह प्रतीक नक्षत्र का सार दर्शाता है और इसमें जन्मे व्यक्तियों के स्वभाव को आकार देता है।
अधिष्ठाता देव: विष्णु
इसके देवता विष्णु, पालक, ज्ञान, व्यवस्था और दूरगामी दृष्टि देते हैं। श्रवण से जुड़े अनुष्ठानों व उपायों में विष्णु का आवाहन केंद्रीय है।
स्वामी ग्रह: चंद्र
चंद्र द्वारा शासित, यह अध्ययनशील, बुद्धिमान और संवादप्रिय है। चंद्र की दशा (ग्रह-अवधि) व्यक्ति के जीवन में श्रवण के भावों को सर्वाधिक प्रबल करती है।
गण, नाड़ी व योनि
श्रवण देव गण का है — दिव्य, सौम्य स्वभाव — कफ (अंत्य) नाड़ी व वानर योनि सहित। ये तीनों वर्गीकरण वैदिक गुण मिलान में उपयोग होते हैं: गण स्वभाव मापता है, नाड़ी स्वास्थ्य व संतान से, और योनि सहज अनुकूलता से जुड़ी है।
व्यक्तित्व व स्वभाव
श्रवण से प्रबल रूप से प्रभावित व्यक्ति पारंपरिक रूप से ज्ञानी, अच्छे श्रोता, व्यवस्थित और विवेकी, स्वाभाविक विद्यार्थी व शिक्षक होते हैं। सभी नक्षत्रों की भाँति, इसका सटीक स्वरूप पाद, राशि व संपूर्ण जन्म-कुंडली पर निर्भर करता है।
व्यवसाय व वृत्ति
श्रवण पारंपरिक रूप से शिक्षण, मीडिया, विधि, परामर्श, भाषाएँ व विद्वत्ता में सफलता से जुड़ा है। चंद्र की प्रेरणा व विष्णु के गुण इन वृत्तियों की ओर संकेत करते हैं, यद्यपि संपूर्ण कुंडली-विश्लेषण चित्र को और स्पष्ट करता है।
शक्तियाँ व चुनौतियाँ
शक्तियाँ: विद्या, विवेक, संचार और व्यवस्था। चुनौतियाँ: अति-चिंतन, चुगली और विचारों में कठोरता। दोनों की जागरूकता व्यक्ति को श्रवण की ऊर्जा के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसके साथ कार्य करने में सहायता करती है।
श्रवण की विवाह अनुकूलता (योनि)
वैदिक गुण मिलान में श्रवण की वानर योनि है — साझेदारों के बीच सहज अनुकूलता मापने वाला पशु-प्रतीक (योनि कूट)। समान या मित्र योनियाँ अच्छा अंक पाती हैं, जबकि वानर पारंपरिक रूप से मेष योनि से सर्वाधिक विरोध रखती है, अतः ऐसे मिलान को अधिक ध्यान से देखा जाता है। योनि आठ कूटों में से एक है; संपूर्ण गुण मिलान में गण, नाड़ी, वर्ण आदि भी तौले जाते हैं और कुल अंक किसी एक कारक से अधिक महत्वपूर्ण होता है।
श्रवण के चार पाद
प्रत्येक नक्षत्र चार पादों (3°20′ प्रत्येक) में बँटा है, और हर पाद एक भिन्न नवांश (D9) राशि में पड़ता है जो उसके स्वभाव को सूक्ष्म रूप से रंगती है और नामकरण में शिशु का नामाक्षर देती है। जन्म तिथि, समय व स्थान से सटीक पाद जानने हेतु जन्म नक्षत्र कैलकुलेटर का उपयोग करें।
| पाद | नवांश राशि | नामाक्षर |
|---|---|---|
| पाद 1 | मेष | Khi |
| पाद 2 | वृषभ | Khu |
| पाद 3 | मिथुन | Khe |
| पाद 4 | कर्क | Kho |
शुभ कार्य
जब चंद्रमा श्रवण में हो, तो दिन पारंपरिक रूप से अध्ययन, श्रवण और ज्ञान हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त चुनते समय नक्षत्र को शुभ चौघड़िया व तिथि के साथ मिलाएँ और राहु काल से बचें।
श्रवण हेतु रत्न, मंत्र व उपाय
चूँकि श्रवण का स्वामी चंद्र है, इसके उपाय मुख्यतः इसी ग्रह के माध्यम से कार्य करते हैं। पारंपरिक सहायक अभ्यासों में विष्णु की पूजा; चंद्र के उपाय जैसे दूध अर्पण व विष्णु सहस्रनाम का पाठ सम्मिलित हैं।
| स्वामी ग्रह | चंद्र |
| रत्न | मोती |
| धातु | चाँदी |
| बीज मंत्र | ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः |
| उपाय हेतु दिन | सोमवार |
| पूज्य देवता | शिव / चंद्र |
रत्न (ज्योतिष रत्न) योग्य ज्योतिषी से परामर्श के बाद ही धारण करें — ग़लत या अति-प्रबल रत्न हानिकारक हो सकता है। बीज मंत्र का जाप व देवता की पूजा सभी के लिए सुरक्षित है।
पंचांग में श्रवण
चंद्रमा लगभग एक दिन श्रवण में रहता है। सूर्योदय के समय जो नक्षत्र हो वही हर शहर के दैनिक पंचांग में दिखता है और मुहूर्त हेतु उपयोग होता है। सभी 27 नक्षत्र, तिथियाँ व वार जानें, या संपूर्ण पंचांग गाइड पढ़ें।
नक्षत्र गुण पारंपरिक वैदिक (ज्योतिष) स्रोतों पर आधारित हैं और सीखने हेतु दिए गए हैं, भविष्यवाणी हेतु नहीं; व्यक्तिगत मार्गदर्शन हेतु योग्य ज्योतिषी से परामर्श करें।
सामान्य प्रश्न
श्रवण नक्षत्र के स्वामी ग्रह व देवता कौन हैं?
श्रवण का स्वामी ग्रह चंद्र है और अधिष्ठाता देव विष्णु हैं। इसका प्रतीक कान / तीन पदचिह्न है और यह देव गण का है।
श्रवण नक्षत्र किस राशि में आता है?
श्रवण मकर में आता है। प्रत्येक नक्षत्र 13°20′ का होने से कुछ नक्षत्र दो राशियों में फैलते हैं, अलग-अलग पादों के लिए।
श्रवण नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
श्रवण में जन्मे बच्चों का नाम पारंपरिक रूप से Khi, Khu, Khe, Kho से आरंभ होता है — हर पाद के लिए एक अक्षर। सटीक पाद जानने हेतु जन्म नक्षत्र कैलकुलेटर का उपयोग करें।
क्या श्रवण नक्षत्र शुभ है या अशुभ?
कोई नक्षत्र मात्र "शुभ" या "अशुभ" नहीं होता। श्रवण चंद्र व विष्णु के गुण लिए है, जो इसे विशेषकर अध्ययन, श्रवण और ज्ञान हेतु शुभ बनाते हैं। हर नक्षत्र की अपनी शक्तियाँ व चुनौतियाँ होती हैं।
श्रवण नक्षत्र हेतु कौन-से व्यवसाय उपयुक्त हैं?
श्रवण से प्रभावित व्यक्ति पारंपरिक रूप से शिक्षण, मीडिया, विधि, परामर्श, भाषाएँ व विद्वत्ता की ओर आकृष्ट होते हैं।
श्रवण का गण व नाड़ी क्या है?
श्रवण देव गण व कफ (अंत्य) नाड़ी का है, वानर इसकी योनि है — सभी वैदिक गुण मिलान में उपयोग होते हैं।