उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र Uttara Phalguni
12वाँ नक्षत्र — अधिष्ठाता अर्यमा, स्वामी सूर्य, सिंह व कन्या में।
उत्तराफाल्गुनी (Uttara Phalguni) 27 नक्षत्रों में 12वाँ है, जो सिंह व कन्या में फैला है। इसका स्वामी ग्रह सूर्य, अधिष्ठाता देव अर्यमा, और प्रतीक शय्या के पिछले पाये है। मनुष्य गण व गौ योनि वाला उत्तराफाल्गुनी पारंपरिक रूप से विवाह, अनुबंध और स्थायी संबंध हेतु शुभ माना जाता है। इसमें जन्मे शिशुओं का नाम Te, To, Pa, Pi अक्षरों से रखा जाता है।
मुख्य बातें
- स्वामी सूर्य, देवता अर्यमा, प्रतीक शय्या के पिछले पाये।
- राशि: सिंह व कन्या; मनुष्य गण, वात (आदि) नाड़ी, गौ योनि।
- विवाह, अनुबंध और स्थायी संबंध हेतु शुभ।
- नामाक्षर: Te, To, Pa, Pi (हर पाद हेतु एक)।
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र — एक दृष्टि में
| अधिष्ठाता देव | अर्यमा |
| प्रतीक | शय्या के पिछले पाये |
| स्वामी ग्रह | सूर्य |
| गण | मनुष्य |
| नाड़ी | वात (आदि) |
| योनि | गौ |
| राशि | सिंह व कन्या |
| नामाक्षर | Te, To, Pa, Pi |
| क्रमांक | 12 / 27 |
उत्तराफाल्गुनी का प्रतीक व अर्थ
उत्तराफाल्गुनी का प्रतीक शय्या के पिछले पाये है। शय्या के पिछले पाये व झूला सहारा, मिलन और विश्राम की पूर्णता दर्शाते हैं। यह प्रतीक नक्षत्र का सार दर्शाता है और इसमें जन्मे व्यक्तियों के स्वभाव को आकार देता है।
अधिष्ठाता देव: अर्यमा
इसके देवता अर्यमा, अनुबंध व मित्रता के देव, साझेदारी व वचनों को आशीर्वाद देते हैं। उत्तराफाल्गुनी से जुड़े अनुष्ठानों व उपायों में अर्यमा का आवाहन केंद्रीय है।
स्वामी ग्रह: सूर्य
सूर्य द्वारा शासित, यह संबंधों में नेतृत्व और स्थिर उदारता देता है। सूर्य की दशा (ग्रह-अवधि) व्यक्ति के जीवन में उत्तराफाल्गुनी के भावों को सर्वाधिक प्रबल करती है।
गण, नाड़ी व योनि
उत्तराफाल्गुनी मनुष्य गण का है — मानवीय, संतुलित स्वभाव — वात (आदि) नाड़ी व गौ योनि सहित। ये तीनों वर्गीकरण वैदिक गुण मिलान में उपयोग होते हैं: गण स्वभाव मापता है, नाड़ी स्वास्थ्य व संतान से, और योनि सहज अनुकूलता से जुड़ी है।
व्यक्तित्व व स्वभाव
उत्तराफाल्गुनी से प्रबल रूप से प्रभावित व्यक्ति पारंपरिक रूप से सहायक, विश्वसनीय, उदार और साझेदारी-प्रवृत्त, स्वाभाविक परोपकारी होते हैं। सभी नक्षत्रों की भाँति, इसका सटीक स्वरूप पाद, राशि व संपूर्ण जन्म-कुंडली पर निर्भर करता है।
व्यवसाय व वृत्ति
उत्तराफाल्गुनी पारंपरिक रूप से समाज-सेवा, अनुबंध व विधि, नेतृत्व, परामर्श व सेवा में सफलता से जुड़ा है। सूर्य की प्रेरणा व अर्यमा के गुण इन वृत्तियों की ओर संकेत करते हैं, यद्यपि संपूर्ण कुंडली-विश्लेषण चित्र को और स्पष्ट करता है।
शक्तियाँ व चुनौतियाँ
शक्तियाँ: विश्वसनीयता, उदारता, नेतृत्व और निष्ठा। चुनौतियाँ: हठ और दूसरों के प्रति अति-प्रतिबद्धता। दोनों की जागरूकता व्यक्ति को उत्तराफाल्गुनी की ऊर्जा के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसके साथ कार्य करने में सहायता करती है।
उत्तराफाल्गुनी की विवाह अनुकूलता (योनि)
वैदिक गुण मिलान में उत्तराफाल्गुनी की गौ योनि है — साझेदारों के बीच सहज अनुकूलता मापने वाला पशु-प्रतीक (योनि कूट)। समान या मित्र योनियाँ अच्छा अंक पाती हैं, जबकि गौ पारंपरिक रूप से व्याघ्र योनि से सर्वाधिक विरोध रखती है, अतः ऐसे मिलान को अधिक ध्यान से देखा जाता है। योनि आठ कूटों में से एक है; संपूर्ण गुण मिलान में गण, नाड़ी, वर्ण आदि भी तौले जाते हैं और कुल अंक किसी एक कारक से अधिक महत्वपूर्ण होता है।
उत्तराफाल्गुनी के चार पाद
प्रत्येक नक्षत्र चार पादों (3°20′ प्रत्येक) में बँटा है, और हर पाद एक भिन्न नवांश (D9) राशि में पड़ता है जो उसके स्वभाव को सूक्ष्म रूप से रंगती है और नामकरण में शिशु का नामाक्षर देती है। जन्म तिथि, समय व स्थान से सटीक पाद जानने हेतु जन्म नक्षत्र कैलकुलेटर का उपयोग करें।
| पाद | नवांश राशि | नामाक्षर |
|---|---|---|
| पाद 1 | धनु | Te |
| पाद 2 | मकर | To |
| पाद 3 | कुंभ | Pa |
| पाद 4 | मीन | Pi |
शुभ कार्य
जब चंद्रमा उत्तराफाल्गुनी में हो, तो दिन पारंपरिक रूप से विवाह, अनुबंध और स्थायी संबंध हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त चुनते समय नक्षत्र को शुभ चौघड़िया व तिथि के साथ मिलाएँ और राहु काल से बचें।
उत्तराफाल्गुनी हेतु रत्न, मंत्र व उपाय
चूँकि उत्तराफाल्गुनी का स्वामी सूर्य है, इसके उपाय मुख्यतः इसी ग्रह के माध्यम से कार्य करते हैं। पारंपरिक सहायक अभ्यासों में अर्यमा व सूर्य की पूजा; सूर्य के उपाय जैसे सूर्योदय पर अर्घ्य व पिता का सम्मान सम्मिलित हैं।
| स्वामी ग्रह | सूर्य |
| रत्न | माणिक्य |
| धातु | स्वर्ण या ताँबा |
| बीज मंत्र | ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः |
| उपाय हेतु दिन | रविवार |
| पूज्य देवता | सूर्य |
रत्न (ज्योतिष रत्न) योग्य ज्योतिषी से परामर्श के बाद ही धारण करें — ग़लत या अति-प्रबल रत्न हानिकारक हो सकता है। बीज मंत्र का जाप व देवता की पूजा सभी के लिए सुरक्षित है।
पंचांग में उत्तराफाल्गुनी
चंद्रमा लगभग एक दिन उत्तराफाल्गुनी में रहता है। सूर्योदय के समय जो नक्षत्र हो वही हर शहर के दैनिक पंचांग में दिखता है और मुहूर्त हेतु उपयोग होता है। सभी 27 नक्षत्र, तिथियाँ व वार जानें, या संपूर्ण पंचांग गाइड पढ़ें।
नक्षत्र गुण पारंपरिक वैदिक (ज्योतिष) स्रोतों पर आधारित हैं और सीखने हेतु दिए गए हैं, भविष्यवाणी हेतु नहीं; व्यक्तिगत मार्गदर्शन हेतु योग्य ज्योतिषी से परामर्श करें।
सामान्य प्रश्न
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी ग्रह व देवता कौन हैं?
उत्तराफाल्गुनी का स्वामी ग्रह सूर्य है और अधिष्ठाता देव अर्यमा हैं। इसका प्रतीक शय्या के पिछले पाये है और यह मनुष्य गण का है।
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र किस राशि में आता है?
उत्तराफाल्गुनी सिंह व कन्या में आता है। प्रत्येक नक्षत्र 13°20′ का होने से कुछ नक्षत्र दो राशियों में फैलते हैं, अलग-अलग पादों के लिए।
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?
उत्तराफाल्गुनी में जन्मे बच्चों का नाम पारंपरिक रूप से Te, To, Pa, Pi से आरंभ होता है — हर पाद के लिए एक अक्षर। सटीक पाद जानने हेतु जन्म नक्षत्र कैलकुलेटर का उपयोग करें।
क्या उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र शुभ है या अशुभ?
कोई नक्षत्र मात्र "शुभ" या "अशुभ" नहीं होता। उत्तराफाल्गुनी सूर्य व अर्यमा के गुण लिए है, जो इसे विशेषकर विवाह, अनुबंध और स्थायी संबंध हेतु शुभ बनाते हैं। हर नक्षत्र की अपनी शक्तियाँ व चुनौतियाँ होती हैं।
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र हेतु कौन-से व्यवसाय उपयुक्त हैं?
उत्तराफाल्गुनी से प्रभावित व्यक्ति पारंपरिक रूप से समाज-सेवा, अनुबंध व विधि, नेतृत्व, परामर्श व सेवा की ओर आकृष्ट होते हैं।
उत्तराफाल्गुनी का गण व नाड़ी क्या है?
उत्तराफाल्गुनी मनुष्य गण व वात (आदि) नाड़ी का है, गौ इसकी योनि है — सभी वैदिक गुण मिलान में उपयोग होते हैं।