द्वादशी तिथि Dwadashi
बारहवीं तिथि · अधिष्ठाता विष्णु · भद्रा तिथि
द्वादशी (Dwadashi) बारहवीं चंद्र तिथि है, जिसके अधिष्ठाता विष्णु हैं और जो एक भद्रा तिथि है (स्वास्थ्यप्रद — व्यापार, नींव और स्वास्थ्य हेतु शुभ)। द्वादशी, बारहवीं तिथि, एकादशी व्रत को पूर्ण करती है। पंचांग में सूर्योदय के समय जो तिथि हो वही पूरे दिन मानी जाती है।
मुख्य बातें
- अधिष्ठाता देव: विष्णु।
- स्वभाव: भद्रा — स्वास्थ्यप्रद — व्यापार, नींव और स्वास्थ्य हेतु शुभ।
- एक भद्रा तिथि, जो दान, व्रत-पारण व धर्म-कार्यों हेतु शुभ है।
- प्रत्येक चंद्र मास में शुक्ल व कृष्ण दोनों पक्षों में आती है।
द्वादशी — एक दृष्टि में
| अधिष्ठाता देव | विष्णु |
| स्वभाव | भद्रा — स्वास्थ्यप्रद — व्यापार, नींव और स्वास्थ्य हेतु शुभ |
| स्थिति | बारहवीं तिथि (हर पक्ष में) |
द्वादशी तिथि क्या है?
द्वादशी, बारहवीं तिथि, एकादशी व्रत को पूर्ण करती है। चंद्र दिवस होने के कारण द्वादशी किसी भी समय आरंभ या समाप्त हो सकती है, इसलिए पंचांग सूर्योदय के समय चल रही द्वादशी को दिन की तिथि मानता है।
द्वादशी के अधिष्ठाता देव
यह भगवान विष्णु को समर्पित है। द्वादशी के व्रत व पूजा इन्हीं देव को समर्पित होते हैं।
स्वभाव: भद्रा तिथि
द्वादशी तिथियों के भद्रा वर्ग में आती है, जो स्वास्थ्यप्रद — व्यापार, नींव और स्वास्थ्य हेतु शुभ। पाँच स्वभाव — नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता व पूर्णा — पूरे पखवाड़े में दोहराते हैं और तय करते हैं कि दिन किस कार्य हेतु उपयुक्त है।
द्वादशी के त्योहार व व्रत
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी की भोर में होता है; वामन द्वादशी व तुलसी-संबंधी व्रत यहाँ पड़ते हैं।
- वामन द्वादशी — भाद्रपद शुक्ल द्वादशी
- गोवत्स द्वादशी (बछ बारस) — कार्तिक कृष्ण द्वादशी, धनतेरस से पूर्व
- तुलसी / योगेश्वर द्वादशी — प्रबोधिनी एकादशी के बाद की द्वादशी
- एकादशी पारण — जिस प्रातः अधिकांश एकादशी व्रत तोड़े जाते हैं
द्वादशी पर निश्चित त्योहार प्रतिवर्ष आते हैं पर ग्रेगोरियन तिथि बदलती रहती है; कई चंद्र मास व पक्ष पर भी निर्भर हैं। इस वर्ष की तिथियाँ त्योहार व पंचांग पृष्ठों या स्थानीय पंचांग से देखें।
द्वादशी तिथि किसके लिए शुभ है
एक भद्रा तिथि, जो दान, व्रत-पारण व धर्म-कार्यों हेतु शुभ है। मुहूर्त चुनते समय तिथि को शुभ नक्षत्र, शुभ चौघड़िया व वार के साथ मिलाएँ और राहु काल से बचें।
पंचांग में द्वादशी
आज द्वादशी है या नहीं, यह किसी भी शहर के दैनिक पंचांग पर देखें। सभी तिथियाँ, वार जानें या संपूर्ण पंचांग गाइड पढ़ें।
तिथि के गुण पारंपरिक स्रोतों पर आधारित हैं; धार्मिक अनुष्ठान हेतु सटीक तिथि व समय अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
सामान्य प्रश्न
द्वादशी तिथि के अधिष्ठाता देव कौन हैं?
द्वादशी तिथि के अधिष्ठाता विष्णु हैं। यह भगवान विष्णु को समर्पित है।
द्वादशी को कौन-से त्योहार पड़ते हैं?
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी की भोर में होता है; वामन द्वादशी व तुलसी-संबंधी व्रत यहाँ पड़ते हैं।
क्या द्वादशी शुभ तिथि है?
एक भद्रा तिथि, जो दान, व्रत-पारण व धर्म-कार्यों हेतु शुभ है।
तिथि क्या है?
तिथि एक चंद्र दिवस है — चंद्रमा को सूर्य से 12° आगे बढ़ने में लगा समय। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में।
भद्रा तिथि क्या होती है?
भद्रा तिथियाँ स्वास्थ्यप्रद — व्यापार, नींव और स्वास्थ्य हेतु शुभ। द्वादशी उनमें से एक है।