🕉️ PanchangDaily

अपरा एकादशी

त्वरित उत्तर

अपरा एकादशी ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी (प्रायः May–June) को पड़ती है। अपरा एकादशी पापों के नाश, असीम पुण्य व यश की प्राप्ति, तथा दिवंगत आत्माओं की शांति हेतु की जाती है।

एक दृष्टि में

तिथिज्येष्ठ कृष्ण पक्ष एकादशी
सामान्य ऋतुMay–June
अधिष्ठाता देवविष्णु

अपरा एकादशी की कथा

श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाई गई अपरा (अचला) कथा बताती है कि झूठी गवाही, निंदा या अन्यायपूर्ण कर्मों जैसे गंभीर पापों से भरा व्यक्ति भी इस व्रत से शुद्ध हो सकता है। 'अपरा' अर्थात असीम — इस व्रत से मिलने वाले अपार पुण्य का सूचक।

महत्व

अपरा एकादशी पापों के नाश, असीम पुण्य व यश की प्राप्ति, तथा दिवंगत आत्माओं की शांति हेतु की जाती है। वर्ष की चौबीस एकादशियों में एक होने के कारण यह भगवान विष्णु को समर्पित ग्यारहवीं एकादशी तिथि का दिन है, जो प्रतिवर्ष ज्येष्ठ के कृष्ण पक्ष में आता है।

विष्णु की पूजा होती है, कथा सुनी जाती है, और दिन उपवास, संयम व दान में बीतता है।

एकादशी व्रत कैसे रखा जाता है

चौबीसों एकादशियों में मूल विधि प्रायः एक-सी है। व्रत दशमी (दसवें दिन) को हल्के, अन्न-रहित भोजन के बाद आरंभ होकर एकादशी भर चलता है। व्रती प्रातः उठकर स्नान करते हैं, संकल्प लेते हैं, फिर तुलसीदल, दीप, धूप व नैवेद्य से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, और दिन प्रार्थना, जप, विष्णु सहस्रनाम या उस दिन की कथा-श्रवण, व दान में बिताते हैं। अनेक रात्रि-जागरण करते हैं। व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी को, निर्धारित समय में विष्णु को भोग अर्पित करने के बाद किया जाता है।

परंपरा में एकादशी को अन्न, चावल, दाल व फलियाँ त्याग दी जाती हैं। व्रती अपनी क्षमता के अनुसार चुनते हैं: बिना जल के पूर्ण निर्जल व्रत; फल, दूध व विहित भोज्य का फलाहार व्रत; या केवल एक अन्न-रहित भोजन। वृद्ध, रोगी, गर्भवती स्त्रियों व बच्चों को कोमल व्रत की सलाह है। दिन का भाव — संयम, भक्ति व दान — कठोरता से अधिक महत्वपूर्ण है।

यह पृष्ठ अपरा एकादशी के पारंपरिक महत्व व विधि का वर्णन करता है; यह पंडित के मार्गदर्शन का विकल्प नहीं है। सटीक तिथि व व्रत/पारण समय अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

सामान्य प्रश्न

अपरा एकादशी कब होती है?

अपरा एकादशी ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी (ग्यारहवीं तिथि) को होती है, प्रायः May–June में। ग्रेगोरियन तिथि हर वर्ष बदलती है — इस वर्ष की तिथि हेतु आगामी एकादशी तिथियाँ या अपना स्थानीय पंचांग देखें।

अपरा एकादशी का महत्व क्या है?

अपरा एकादशी पापों के नाश, असीम पुण्य व यश की प्राप्ति, तथा दिवंगत आत्माओं की शांति हेतु की जाती है।

अपरा एकादशी की कथा क्या है?

श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाई गई अपरा (अचला) कथा बताती है कि झूठी गवाही, निंदा या अन्यायपूर्ण कर्मों जैसे गंभीर पापों से भरा व्यक्ति भी इस व्रत से शुद्ध हो सकता है। 'अपरा' अर्थात असीम — इस व्रत से मिलने वाले अपार पुण्य का सूचक।।

एकादशी को क्या खा सकते हैं?

अन्न, चावल, दाल व फलियाँ त्यागी जाती हैं। अनेक लोग फल, दूध व मेवे का फलाहार व्रत रखते हैं; कठोरतम निर्जल (बिना जल) व्रत रखते हैं। अपने स्वास्थ्य अनुसार चुनें।

कठोर एकादशी व्रत किसे नहीं रखना चाहिए?

वृद्ध, रोगी, गर्भवती स्त्रियों व बच्चों को निर्जल के बजाय कोमल फलाहार व्रत की सलाह है। भक्ति व संयम कठोरता से अधिक महत्वपूर्ण हैं।

पारण (व्रत तोड़ना) कब होता है?

व्रत अगले दिन द्वादशी को, निर्धारित पारण-काल में विष्णु को भोग अर्पित करने के बाद तोड़ा जाता है। पारण-समय स्थान अनुसार बदलता है — अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।