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सफला एकादशी

त्वरित उत्तर

सफला एकादशी पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी (प्रायः December–January) को पड़ती है। 'सफला' अर्थात फलदायी; यह एकादशी इसलिए की जाती है कि प्रयास व कार्य सफल हों, तथा सुधार व क्षमा हेतु।

एक दृष्टि में

तिथिपौष कृष्ण पक्ष एकादशी
सामान्य ऋतुDecember–January
अधिष्ठाता देवविष्णु

सफला एकादशी की कथा

सफला कथा राजा माहिष्मत के बिगड़ैल, चोर पुत्र लुम्पक की है, जो वन में निर्वासित था। ठंड व भूख में उसने अनजाने ही रात्रि-जागरण किया और सफला एकादशी को विष्णु को फल अर्पित किए; उस पुण्य से वह सुधर गया, क्षमा पाकर अपना स्थान पुनः प्राप्त किया।

महत्व

'सफला' अर्थात फलदायी; यह एकादशी इसलिए की जाती है कि प्रयास व कार्य सफल हों, तथा सुधार व क्षमा हेतु। वर्ष की चौबीस एकादशियों में एक होने के कारण यह भगवान विष्णु को समर्पित ग्यारहवीं एकादशी तिथि का दिन है, जो प्रतिवर्ष पौष के कृष्ण पक्ष में आता है।

अन्न त्यागकर विष्णु को फल अर्पित कर बाद में ग्रहण किया जाता है; व्रत व रात्रि-जागरण रखकर द्वादशी को पारण होता है।

एकादशी व्रत कैसे रखा जाता है

चौबीसों एकादशियों में मूल विधि प्रायः एक-सी है। व्रत दशमी (दसवें दिन) को हल्के, अन्न-रहित भोजन के बाद आरंभ होकर एकादशी भर चलता है। व्रती प्रातः उठकर स्नान करते हैं, संकल्प लेते हैं, फिर तुलसीदल, दीप, धूप व नैवेद्य से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, और दिन प्रार्थना, जप, विष्णु सहस्रनाम या उस दिन की कथा-श्रवण, व दान में बिताते हैं। अनेक रात्रि-जागरण करते हैं। व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी को, निर्धारित समय में विष्णु को भोग अर्पित करने के बाद किया जाता है।

परंपरा में एकादशी को अन्न, चावल, दाल व फलियाँ त्याग दी जाती हैं। व्रती अपनी क्षमता के अनुसार चुनते हैं: बिना जल के पूर्ण निर्जल व्रत; फल, दूध व विहित भोज्य का फलाहार व्रत; या केवल एक अन्न-रहित भोजन। वृद्ध, रोगी, गर्भवती स्त्रियों व बच्चों को कोमल व्रत की सलाह है। दिन का भाव — संयम, भक्ति व दान — कठोरता से अधिक महत्वपूर्ण है।

यह पृष्ठ सफला एकादशी के पारंपरिक महत्व व विधि का वर्णन करता है; यह पंडित के मार्गदर्शन का विकल्प नहीं है। सटीक तिथि व व्रत/पारण समय अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

सामान्य प्रश्न

सफला एकादशी कब होती है?

सफला एकादशी पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी (ग्यारहवीं तिथि) को होती है, प्रायः December–January में। ग्रेगोरियन तिथि हर वर्ष बदलती है — इस वर्ष की तिथि हेतु आगामी एकादशी तिथियाँ या अपना स्थानीय पंचांग देखें।

सफला एकादशी का महत्व क्या है?

'सफला' अर्थात फलदायी; यह एकादशी इसलिए की जाती है कि प्रयास व कार्य सफल हों, तथा सुधार व क्षमा हेतु।

सफला एकादशी की कथा क्या है?

सफला कथा राजा माहिष्मत के बिगड़ैल, चोर पुत्र लुम्पक की है, जो वन में निर्वासित था। ठंड व भूख में उसने अनजाने ही रात्रि-जागरण किया और सफला एकादशी को विष्णु को फल अर्पित किए; उस पुण्य से वह सुधर गया, क्षमा पाकर अपना स्थान पुनः प्राप्त किया।।

एकादशी को क्या खा सकते हैं?

अन्न, चावल, दाल व फलियाँ त्यागी जाती हैं। अनेक लोग फल, दूध व मेवे का फलाहार व्रत रखते हैं; कठोरतम निर्जल (बिना जल) व्रत रखते हैं। अपने स्वास्थ्य अनुसार चुनें।

कठोर एकादशी व्रत किसे नहीं रखना चाहिए?

वृद्ध, रोगी, गर्भवती स्त्रियों व बच्चों को निर्जल के बजाय कोमल फलाहार व्रत की सलाह है। भक्ति व संयम कठोरता से अधिक महत्वपूर्ण हैं।

पारण (व्रत तोड़ना) कब होता है?

व्रत अगले दिन द्वादशी को, निर्धारित पारण-काल में विष्णु को भोग अर्पित करने के बाद तोड़ा जाता है। पारण-समय स्थान अनुसार बदलता है — अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।